राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।
बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥
राम-नाम का आश्रय लिए बिना जो लोग मोक्ष की आशा करते हैं अथवा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चारों परमार्थों को प्राप्त करना चाहते हैं वे मानो बरसते हुए बादलों की बूँदों को पकड़ कर आकाश में चढ़ जाना चाहते हैं। भाव यह है कि जिस प्रकार पानी की बूँदों को पकड़ कर कोई भी आकाश में नहीं चढ़ सकता वैसे ही राम नाम के बिना कोई भी परमार्थ को प्राप्त नहीं कर सकता।
🦚🦚जय सियाराम🦚🦚
#गुरुःसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः🚩🕉️🦚🦚🌹🌹 #🕉️📿श्री हरिहर स्वरुप।📿🚩🕉️🦚🦚🌼🌼 #🍁🌷 जय श्री सीताराम 🌺🌺🙏🚩🕉️🦚🦚🌲🌲 #🙏🥀 जय श्री सीताराम🥀🙏🚩🕉️🦚🦚🌸🌸 #🙏🌹🌻🌹 जय श्री सीताराम🌹🌻🌹🙏🚩🕉️🦚🦚🥀🥀🌷🌷🍂🍂☘️☘️🪻🪻