#नितिन_दास_जी_का_सत्संगसाहेब बंदगी सतनाम जी
नर नारी कीट पतंगा। सार शब्द सबही के संगा।।
आत्म ज्ञान बिना नर भटके कभी काबा कभी काशी।
जल में मीन पियासी मोहे देखत आवे हांसी।।
सत्यनाम हैं सार बूझो संत विवेक करि।
उतरो भवजल पार सतगुरू का उपदेश यही।।
कलियुग में सतयुग का आगमन, निः कलंक अवतार आत्म ज्ञान का अवतार नितिन दास जी के द्वारा प्रचार प्रसार , कहत कबीर सुनो भाई साधो, यू ट्यूब चैनल पर सर्च करे, और अपना जन्म मरण का दुख सुख हमेशा हमेशा के समाप्त करे नही तो फिर से चौरासी में जाना पड़ेगा।।#नितिन_दास_जी_का_सत्संग