गढ़पुर धाम में गोपीनाथजी महाराज की दिव्य लीला: गर्मियों में मूर्ति से पसीना गुजरात के बोटाद जिले में स्थित गढ़पुर (गढ़ड़ा) स्वामिनारायण मंदिर भक्तों के लिए एक अत्यंत पावन तीर्थ स्थल है। यहाँ श्री गोपीनाथजी महाराज की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें स्वामिनारायण संप्रदाय के अनुयायी परम पूज्य मानते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि गर्मियों के प्रचंड तापमान में गोपीनाथजी महाराज की मूर्ति से पसीना निकलता देखा जाता है। यह चमत्कारिक घटना भक्तों में आस्था का संचार करती है और उन्हें भगवान की जीवंत उपस्थिति का अनुभव कराती है। गढ़पुर धाम का इतिहासश्री स्वामिनारायण भगवान ने स्वयं १८२८ ई. में गढ़ड़ा में इस मंदिर की स्थापना की थी। गोपीनाथजी महाराज की मूर्ति को स्वयं भगवान ने अपने हाथों से प्रतिष्ठा की मूर्तिकार नारायणजी सुतार से बनवाया था। कहा जाता है कि मूर्ति भगवान के वास्तविक स्वरूप के अनुपात में बनी है। प्राण प्रतिष्ठा क़े समय भगवान कई बार गोपीनाथजी की मूर्ति मैं प्रवेश कर गए हजारों भक्तों से समने ए लीला करके स्वामिनारायण ने भक्तों ए बतया की हम ईस मूर्ति मैं साक्षात् रहें है गढ़पुर को स्वामिनारायण संप्रदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ भगवान ने लंबे समय तक रहें थे ।यह मंदिर केवल पत्थर और मूर्ति का नहीं, बल्कि जीवंत भक्ति और लीला का केंद्र है। भक्तों की मान्यता है कि गोपीनाथजी महाराज यहाँ वास्तव में विराजमान हैं और अपनी भक्तों की पीड़ा, सुख-दुख को महसूस करते हैं।पसीने की लीला: भगवान की करुणा का प्रतीकगर्मियों में जब आस-पास का तापमान ४०-४५ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, तब गोपीनाथजी महाराज की मूर्ति पर पसीने की बूँदें दिखाई देती हैं। यह घटना कई बार दर्ज की गई है। वर्ष २०२२ में भी इस लीला की खबरें और वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें भक्तों ने भाव-विभोर होकर दर्शन किए। भक्तों का विश्वास है कि:यह पसीना भगवान की गर्मी सहन न कर पाने की लीला है। या फिर संसार की पीड़ा और भक्तों के पापों को अपने ऊपर लेने का प्रतीक है। कुछ इसे भगवान की जीवंतता का प्रमाण मानते हैं, ठीक वैसे ही जैसे उनकी कलाई पर बंधी घड़ी भी धड़कन के अनुसार चलती है। मंदिर के पुजारियों और संतों द्वारा इस लीला को विशेष श्रद्धा से देखा जाता है। पसीना निकलने पर मूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। यह घटना वैज्ञानिक दृष्टि से आर्द्रता या सामग्री से जुड़ी हो सकती है, लेकिन आस्था की दृष्टि से यह भगवान की अपार करुणा और भक्त-वात्सल्य का प्रमाण है।भक्तों का अनुभवगढ़पुर धाम आने वाले भक्त कहते हैं कि गोपीनाथजी के दर्शन मात्र से मन शांत हो जाता है। गर्मी में पसीना देखकर कई भक्त रो पड़ते हैं और “जय स्वामिनारायण” के जयकारे लगाते हैं। यह लीला भगवान को साकार रूप में अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है। मंदिर में प्रतिदिन भव्य श्रृंगार, आरती और कीर्तन होते हैं, जो भक्तिमय वातावरण बनाते हैं। #जय_स्वामिनारायण #जय_श्री राम 🙏🙏 #जयभोलेनाथ #जय_हनुमान🙏🚩 #जय श्री कृष्णा

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#reenupal

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