देश के नेतृत्व,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने अपने इस प्रेरणादायी संबोधन में भारतीय संस्कृति की उदार सोच और महान आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर धार्मिक अनुष्ठान "विश्व का कल्याण हो" और "प्राणियों में सद्भाव हो" जैसी मानवतावादी उद्घोषणाओं के साथ संपन्न होता है, जो हमारी सभ्यता की वैश्विक और निस्वार्थ सोच को दर्शाता है।
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भारत के प्रधान सेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने इस बात पर जोर दिया कि हमारा अध्यात्म न केवल शांति का पाठ पढ़ाता है, बल्कि हर कदम पर जीवन को सही राह भी दिखाता है। आत्म-संयम से आत्मज्ञान, और आत्मज्ञान से आत्म-साक्षात्कार के जरिए आत्म-शांति का जो मार्ग भारतीय परंपरा ने दिया है, वह आज पूरे विश्व को एकजुट करने और मानवता के कल्याण का सबसे सशक्त माध्यम है।
जय हिन्द
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#✍️ विचार