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करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् । विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ हे परमेश्वर! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मन से अभी तक जो भी अपराध किए हैं। वे विहित हों अथवा अविहित, उन सब पर आपकी क्षमापूर्ण दृष्टि प्रदान कीजिए। हे करुणा के सागर भोले भंडारी श्री महादेवजी, आपकी जय हो। जय हो। #shortvideo #comingsoon #viralvideo #trending #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें Follow me 👇 Sharechat user ID 👉@jayshambhu_1234 Moj user ID 👉@haharmahadev123456 MojLive user ID👉 @bhaktishindustaiofficial

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1 दिन पहले