जहाँ अहमियत न हो, वहाँ ठहरना बेकार है,
चाहे वह कोई रिश्ता हो या किसी का दरबार है।
खामोशी से निकल जाना ही बेहतर होता है वहाँ,
जहाँ कदर नहीं, वहाँ जज़्बातों का व्यापार है।
अपनी हस्ती को यूँ गैरों के आगे न झुकाया करो,
आत्म-सम्मान ही इंसान का असली श्रृंगार है।
नमः शिवाय शुभ प्रभात सुन्दर सोमवार नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे सनातन संस्कृति #🕉 नमः शिवाय शुभ प्रभात सुन्दर सोमवार