#🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें देश के मान-सम्मान, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर। भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ उठने वाली किसी भी मांग या आवाज की निंदा करना हर राष्ट्रभक्त नागरिक का परम कर्तव्य है।
जब भी ऐसे सार्वजनिक मंचों या आंदोलनों का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी बयानबाज़ी या देश को बांटने वाली मांगों के लिए किया जाता है, तो उससे देश के हर नागरिक का आहत होना पूरी तरह स्वाभाविक है।
इस विषय पर कुछ मुख्य बातें ध्यान देने योग्य हैं:
राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता सर्वोपरि: विचार-प्रकट करने या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार लोकतंत्र में सभी को है, लेकिन इसकी सीमा वहां समाप्त हो जाती है जहाँ देश की संप्रभुता और अखंडता पर कोई बात आए। भारत के टुकड़े करने जैसी मांगों का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं किया जा सकता।
मंचों का दुरुपयोग: अक्सर देखा जाता है कि राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों की आड़ में कुछ असामाजिक या उपद्रवी तत्व अपने निजी व राष्ट्रविरोधी एजेंडे को हवा देने की कोशिश करते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही: अगर किसी मंच का इस्तेमाल देश की एकता को नुकसान पहुँचाने या भड़काऊ बातें करने के लिए होता है, तो संबंधित अधिकारियों और कानून-व्यवस्था की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे इसकी जाँच करें और कड़े कदम उठाएं
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष
लेखिका कवयित्री
सोनी शुक्ला क्रांति
लखनऊ उत्तर प्रदेश
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