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'सस्ती-सी दवा तू' "मरीज़ बन के रहा हूँ उम्र भर, केवल अंतिम इलाज है तू," तेरी पायल की झंकार है दवा, पर तुम आओगी क्या? इतनी सस्ती-सी खुशी है मेरी, इतना सस्ता है इलाज, सुकून से मुस्कुरा लूँ फिर एक बार, पर तुम आओगी क्या? तेरे साथ खिंची एक तस्वीर को बार-बार देखता हूँ, रूबरू बैठकर देख लूँ ज़रा तुम्हें, पर तुम आओगी क्या?" हद से बढ़ा है ताल्लुक तुझसे, मेरा लौटना अब मुश्किल है," #🥰प्रेम कविता📝 #🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #💖रोमॅन्टीक Love #💔ब्रेकअप😪 एक बार तुझसे मिलके, फिर खुद से मिल जाऊँ, पर तुम आओगी क्या? मैंने तुझमें इश्क़, मोहब्बत, प्रेम ढूँढा, खता थी,सखी! दोस्त बनके पुकार लूँ अगर... पर तुम आओगी क्या? आंखें थक सी गई हैं इंतज़ार में, पर,बोलो! तुम आओगी क्या? अमोल हरिदास.

588 जणांनी पाहिले
6 दिवसांपूर्वी