"अजनबी"
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परवाह नहीं करते कभी हम,
जो किन्ही भी फितरतों की....
अजनबी बनकर ही फिर से,
हमे आजमाने लगा है कोई!
दिल अपना है कुछ ऐसा कि,
उतर जाए हर ख्वाबों में...
छुपछुप कर इन सपनों में भी,
आजकल आने लगा है कोई!
अब दिल का क्या है कभी भी
गुजर जाए किन्ही गलियों से...
जानबूझकर ही अपने एहसासों में,
अक्सर गले लगाने लगा है कोई!
चाहकर भी जो कह न सके कभी,
अपनी जुबाँ से हाल-ए-दिल कहीं...
बखूभी यही बात सम्भलकर ही,
खामोशी से हमसे छुपाने लगा है कोई!
जिंदगी के जाने पहचाने पलों में,
कई बार गुजर गए दिल-ए-हलचल..
बस अपना बनकर ही बेवजह भी,
हमे भी अपना बनाने लगा है कोई!
ये दिल करते रहे हैं इंतजार पर भी,
कभी भी इकरार कर न पाए...
बस बहुत दूर से ही हमे कहकर,
बेजुबान हो सबकुछ बताने लगा है कोई!
हर दूरियों में भी भला अब क्या-क्या,
दिलतक बचा हुआ भरपूर बाकी है...
हमाए मन टीम में 18-20 के नाम दिखे,
बस 2-2 के झुनझुना बजाने लगा है कोई!
इन रातों में भी जानबूझकर हमे ही,
छेड़-छेड़ बहुत ही सताने लगा है कोई!!💕💞
............✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️