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|| अंदर ही अंदर मलबों का इक ढेर बचा है, बाहर से लगता है जैसे अब भी शहर बचा है, वो जो कत्ल कर गए मेरा लफ्ज़ों की साज़िश से, हैरान हैं कि मुझमें अभी तक कौन सा ज़हर बचा है || ✒️ Writer: Rudra Pani Trivedi #rudrapanitrivedi #shayari #reels #shorts #instareels #💔ब्रेकअप शायरी✍ #👍स्पेशल शायरी🖋 #📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️

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6 दिन पहले