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काका हाथरसी की यह कविता आज के माहौल के हिसाब से प्रासंगिक बन पड़ी है। सुनिए, पढ़िए और आनंद लीजिए।। जय बोलो बईमान की... मन मैला तन ऊजरा भाषण लच्छेदार ऊपर सत्याचार है भीतर भ्रष्टाचार झूठों के घर पंडित बाँचें कथा सत्य भगवान की जय बोलो बेईमान की! लोकतंत्र के पेड़ पर कौआ करें किलोल टेप-रिकार्डर में भरे चमगादड़ के बोल नित्य नयी योजना बनतीं जन-जन के कल्याण की जय बोलो बेईमान की! महँगाई ने कर दिए राशन – कारड फेल पंख लगाकर उड़ गए चीनी-सिलेंडर-तेल क्यू में धक्का मार किवाड़ें बंद हुईं दूकान की जय बोलो बेईमान की! ​#publicvoices ​#socialawareness ​#pricerise ​#democracy ​#politicalsatire #🥰Express Emotion #moj_content

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6 दिन पहले