सत्य की पुनर्स्थापना: कलयुग को "अधर्म" का प्रतीक माना जाता है। पाठ 6 सिखाता है कि सत्य (Truth) ही वह नींव है जिस पर नए युग का निर्माण होगा। सामूहिक रूप से सत्य बोलने और सत्य के मार्ग पर चलने से समाज में परिवर्तन आता है।
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