माधुर्यादपि मधुरं मन्मथतातस्य किमपि कैशौरं।
चापल्यादपि चपलं चेतो वत हरति हन्ति कि कूर्म:।।
चित्त को व्याकुल कर देनेवाला श्रीकृष्ण का क्या अनिर्वचनीय कैशोर है ! वह माधुर्य से भी मधुर और चापल्य से भी चपल है।
श्रीकृष्ण का वह कैशोर मेरे चित्त को हर लिया है, अब मैं क्या करूॅं ?
हे कृष्ण! करुणासिन्धु! दीनबन्धु! जगत्पते!
गोपेश! गोपिकाकान्त! राधाकान्त! नमोऽस्तुते।। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु😇