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स्त्री की नाभि एक जल स्त्रोत होती है, जहाँ प्रेमी की साँसों से एक ज्वार बनता और स्त्री की देह समंदर हो जाती है.. जब तुम्हारे होंठ मेरी नाभि के द्वार पर रुके, तब ऐसा लगा मानो मेरी जन्मों की थकान उतर गई हो, और मैं सिर्फ़ एक स्त्री नहीं रही, बल्कि ब्रह्मा की उस पहली कल्पना हो गई जहाँ प्रेम देह से नहीं, संसार की उत्पत्ति से जुड़ा हुआ होता है। नाभि से जो प्रेम शुरू होता है, वो सिर्फ़ स्पर्श नहीं होता.. वो सृजन की एक प्रतिज्ञा होती है।❣️💕😍🌹💖 #💝 शायराना इश्क़ #💓 मोहब्बत दिल से

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14 घंटे पहले