#_3_मुहर्रम_को_क्या_हुआ_था?-
(_उमर_ए_साद_) की आमद: 3 मुहर्रम को कुफा का लश्कर-ए-अज़ीम, जिसका कमांडर उमर-ए-साद (इब्ने साद) था, कर्बला के मैदान में पहुँचा। इसके साथ ही दुश्मन की फौज की तादाद में भारी इज़ाफा हो गया।
इमाम हुसैन (अ.स.) से मुजाहिदा: उमर-ए-साद ने इमाम हुसैन (अ.स.) के खेमों (तंबुओं) को चारों तरफ से घेर लिया ताकि इमाम और उनके साथी पानी और रसद के लिए बाहर न जा सकें और किसी तरह की मदद भी न मिल सके।
बातचीत का सिलसिला: 3 मुहर्रम को ही इमाम हुसैन (अ.स.) और उमर-ए-साद के बीच आखिरी दौर की बातचीत हुई थी। इमाम ने उसे समझाने की कोशिश की कि वे इस खून-खराबे से बचें, लेकिन उमर-ए-साद ने सत्ता और लालच में इमाम की किसी बात को नहीं माना और जंग के लिए तैयार रहा।
यह दिन इमाम हुसैन (अ.स.) के सब्र और उनके साथियों के हौसले की परीक्षा का दिन था, क्योंकि दुश्मन ने पूरी तरह से शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।
.
.
.
.
.
#ImamHussain #Karbala #3Muharram #YaHussain #MuharramulHaram #Hussaini #Haqq #HistoryOfKarbala #Islam #PeaceAndSacrifice #ya hussain