अध्याय 5 – कर्म संन्यास योग
इस अध्याय में अर्जुन पूछते हैं कि कर्म करना श्रेष्ठ है या सब कुछ छोड़कर संन्यास लेना?
भगवान Krishna बताते हैं कि केवल काम छोड़ देना ही संन्यास नहीं है। सबसे श्रेष्ठ वह है जो अपना कर्तव्य करता है, लेकिन फल और अहंकार का त्याग करता है।
इस अध्याय की मुख्य बातें
1. कर्म करते हुए भी मन शांत रखो
अपने काम पूरे मन से करो, लेकिन सफलता या असफलता से अपने मन को विचलित मत होने दो।
2. सच्चा संन्यास क्या है?
सच्चा संन्यास कपड़े बदलने से नहीं, बल्कि अहंकार, लोभ और स्वार्थ छोड़ने से होता है।
3. सभी में भगवान को देखो
ज्ञानी व्यक्ति हर जीव में एक ही परमात्मा का अंश देखता है। इसलिए किसी से घृणा नहीं करता। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏 भजन संग्रह 🎵 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स