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हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का संबंध केवल भक्त और भगवान का संबंध नहीं था,वह उस आत्मा और परमात्मा का मिलन था जहाँ “मैं” धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। हनुमान जी ने कभी प्रभु श्रीराम से अपने लिए कुछ नहीं माँगा, क्योंकि जिनके हृदय में राम बस जाते हैं, उनके भीतर इच्छाएँ स्वयं शांत होने लगती हैं। हनुमान जी के लिए सबसे बड़ा सुख शक्ति, सम्मान या सिद्धियाँ नहीं थीं ,उनका सबसे बड़ा आनंद केवल प्रभु के चरणों में समर्पित रहना था। और शायद यही इस संबंध का सबसे गहरा सत्य है,जहाँ प्रेम इतना पवित्र हो जाए कि भक्ति बोझ नहीं, श्वास बन जाए, जहाँ प्रभु केवल मंदिरों में नहीं, हर ह्रदय की हर धड़कन में अनुभव होने लगें। #kainchidham #ram #jaishreeram #neemkarolibaba #jaishreeram #🚩नीम करोली बाबा 🙏

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9 घंटे पहले