चेतावनी: इंसान को इंसान रहने दो
मर्यादा की सीमा तोड़ो, इतना न सम्मान करो,
मिट्टी के पुतले को तुम, ईश्वर का न नाम दो।
भक्ति करो उस परमात्मा की, जो जग का आधार है,
इंसान तो बस हाड़-मांस है, कर्मों का अवतार है।
सुनो मैथिली! सुरों की साधना, पथ से भटक न जाए,
चाटुकारिता की आँधी में, सत्य कहीं दब न जाए।
अमृत होता है चरणों में, यह अंधभक्त की वाणी है,
सजग समाज के लिए तो यह, केवल एक नादानी है।
लोकतंत्र की इस धरती पर, जनता ही भगवान है,
नेताओं के कर्मों पर ही, टिका हुआ संविधान है।
अवतारों की संज्ञा देकर, तुम प्रश्न पूछना छोड़ दोगी,
आने वाली पीढ़ी का तुम, सारा रुख ही मोड़ दोगी।
कलम मेरी 'क्रांति' लिखती, समाज को जगाने आई हूँ,
अंधभक्ति के इस घेरे में, आईना दिखाने आई हूँ।
कलाकार हो, सुरों से तुम, राष्ट्र का गौरव गान करो,
इंसान को भगवान न मानों, ईश्वर का अपमान न करो।
— सोनी शुक्ला 'क्रांति
'लेखिका कवयित्री
(संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनहित सर्व समाज सेवा समिति) लखनऊ उत्तर प्रदेश
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