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सियाह रात थी गर्दिश में जब सितारा था मेरी खुशी को पत्थर किसी ने मारा था लिखेगी ज़िंदगी उस को सुनहरी लफ्ज़ों में तुम्हारे बाद मेंने वक़्त जो गुज़ारा था तुम्हारे हिज्र की तल्ख़ी का ज़हर पीते हुए कहीं पे आ के मेंने हौसला भी हारा था..!! #💔दर्द भरी कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #👫हिंदू शादी रस्मे #✍मेरे पसंदीदा लेखक

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7 दिन पहले