त्र्यंबकेश्वर केवल ज्योतिर्लिंग नहीं, गोदावरी और त्रिमूर्ति के अद्वैत भाव से जुड़ा पवित्र तीर्थ है।
महाराष्ट्र के नासिक जनपद में ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी पर स्थित यह तीर्थ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, महर्षि गौतम की तपस्या से यहाँ गंगा का अवतरण हुआ और वही धारा गोदावरी के रूप में प्रवाहित हुई। इसलिए इसे दक्षिण गंगा कहा जाता है।
त्र्यंबकेश्वर की विशेषता केवल उसका प्राचीन स्थापत्य नहीं है। गर्भगृह में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक रूपों की आराधना सृष्टि, पालन और संहार के अद्वैत भाव को व्यक्त करती है।
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