जैसे उपजाऊ खेत में बोया हुआ बीज शाखा-पत्र-पुष्पादि अनेक रूप धारण कर लेता है, वैसे ही कालगति से माया का आश्रय लेकर शक्ति-विभाजन के द्वारा परमेश्वर ही अनेक रूपों में प्रतीत होने लगता है।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/११/१२/२०
श्रीमद्भागवत-महापुराण/11/12/20
#PuranikYatra #MBAPanditJi #shrimadbhagwatkatha #shrimadbhagwat #PuranikYatra #MBAPanditJi