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​भले ही हम ऊँची इमारतों में आशियाना बना लें, पर मन की खिड़की तो आज भी उस पीपल की छांव में खुलती है। शहर की रोशनी में भले ही रातें जागती हों, पर रूह तो गाँव की उसी तारों भरी रात में सुस्ताती है #🙏🏻गुरबानी #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇

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21 घंटे पहले