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व्यास-रचित मूल महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध केवल एक राजनीतिक या वंशगत युद्ध नहीं था, बल्कि धर्म, कर्म और मोक्ष की दिव्य योजना का भाग था। इसी कारण युद्ध में भाग लेने वाले सभी योद्धाओं की गति को सामान्य मृत्यु से ऊपर माना गया है।
1️⃣ कुरुक्षेत्र युद्ध और मोक्ष
महाभारत में स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि कुरुक्षेत्र धर्मक्षेत्र था।
यहाँ युद्ध करते हुए प्राण त्यागने वाले योद्धा—
व्यक्तिगत द्वेष से नहीं
बल्कि अपने स्वधर्म के पालन में
श्रीकृष्ण की उपस्थिति में
युद्धरत थे।
इसलिए उन्हें पापबंधन से मुक्ति और उच्च लोकों की प्राप्ति हुई। कई आचार्य इसे सद्यः मोक्ष या उत्तम लोकगति मानते हैं।
2️⃣ अर्जुन को “उत्तम गति” क्यों मिली?
अर्जुन की स्थिति अन्य योद्धाओं से अलग थी, क्योंकि—
वे स्वयं श्रीकृष्ण के सखा और शरणागत थे
उन्हें गीता का उपदेश प्रत्यक्ष मिला
उन्होंने युद्ध अहंकार से नहीं, बल्कि ईश्वर की आज्ञा से किया
इस कारण अर्जुन को केवल स्वर्ग ही नहीं, बल्कि ईश्वर-सान्निध्य प्राप्त हुआ — जिसे ग्रंथों में उत्तम गति कहा गया है।
3️⃣ युधिष्ठिर का स्वर्ग दर्शन
महाभारत के स्वर्गारोहण पर्व में वर्णन आता है कि जब
युधिष्ठिर स्वर्ग पहुँचे, तो उन्होंने देखा—
अर्जुन दिव्य रूप में
श्रीकृष्ण की सेवा में संलग्न हैं
वहाँ अर्जुन न तो योद्धा हैं, न राजा
बल्कि भक्त और सेवक हैं