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*🦚 महाबलेश्वर , महाराष्ट्र 🦚*
भारत के महाराष्ट्र राज्य के सतारा ज़िले में स्थित महाबलेश्वर एक नगर है। यह इसी नाम के तालुका का मुख्यालय भी है। यहाँ समीप ही कृष्णा नदी का उद्गम है , जिसके कारण से यह एक हिन्दू तीर्थस्थान भी है। महाबलेश्वर रमणीय वातावरण से घिरा एक हिल स्टेशन व पर्यटन स्थल है। ऊँची चोटियाँ , भय पैदा करने वाली घाटियाँ , चटक हरियाली , ठण्डी पर्वतीय हवा , महाबलेश्वर की विशेषताएँ है। यह महाराष्ट्र का सर्वाधिक लोकप्रिय पर्वतीय स्थान है और एक समय ब्रिटिश राज के दौरान यह बॉम्बे प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी ।
*यहाँ महाबलेश्वर का प्रसिद्ध प्राचीन शिव मन्दिर है , जहाँ स्वयं भू लिंग विराजमान है एवं भगवान शिव का रुद्राक्ष के आकार का विग्रह है ।*
महाबलेश्वर मन्दिर के गर्भगृह में 6 फिट ऊॅंचा ‘स्वयंभू’ (स्वयं उत्पन्न) शिव लिंग है , जिसे “महालिंगम” के नाम से जाना जाता है , जो दुनिया में एकमात्र रुद्राक्ष के आकार का शिव लिंग होने के कारण यह शिवलिंग अद्वितीय है। हजारों साल पुराना यह शिवलिंग ‘त्रिगुणात्मक लिंग’ का प्रतीक है , जो महाबलेश्वर , अतिबलेश्वर और कोटेश्वर का प्रतीक है। मन्दिर परिसर में नंदी और कालभैरव की कई मूर्तियाँ भी विद्यमान हैं।
महाबलेश्वर मन्दिर स्वयं लगभग 800 वर्ष पुराना है , जबकि स्वयंभू शिव लिंग करोड़ों वर्ष पुराना माना जाता है ; जिनमें त्रिशूल , रुद्राक्ष और डमरू शामिल हैं , जो लगभग 300 साल पुराने हैं .ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव स्वयं सावन के पवित्र महीने में इन पवित्र वस्तुओं का उपयोग करने के लिए इस मन्दिर में आते हैं। मन्दिर में एक बिस्तर , त्रिशूल , डमरू और रुद्राक्ष है , माना जाता है कि भगवान शिव हर रात मन्दिर में इसका इस्तेमाल करते हैं , क्योंकि हर सुबह बिस्तर बिखर जाता है।कहते है महबलेश्वर ही वह स्थान है जहाँ भगवान शिव ने अपने कालभैरव रूप को प्रकट किया , यही वह स्थान है जहाँ ब्रह्मजी के छटे सिर को भिराव ने धड़ से अलग किया था।
पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि की रचना के दौरान भगवान ब्रह्मा मानव की रचना के लिए सह्याद्रि के जंगलों में ध्यान कर रहे थे। उस समय दो राक्षस भाई , अतिबल और महाबल ने इस क्षेत्र में आतंक मचा रखा था दोनो राक्षस , ऋषियों और अन्य प्राणियों को परेशान कर रहे थे। तब ब्रह्मदेव के कहने पर भगवान विष्णु अतिबल को मारने में कामयाब रहे , वहीं महाबल को अमरता का वरदान प्राप्त था , महाबल को इस संसार से मुक्ति दिलाने के लिए ब्रह्मा और विष्णु ने भगवान शिव और देवी आदिमाया से प्रार्थना की तब महाबल का संहार किया ; परिणामस्वरूप , भगवान शिव रुद्राक्ष के आकार में शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए , और महाबल के नाम से इस क्षेत्र का नाम ‘ महाबलेश्वर ' रखा गया।
महाबलेश्वर में अनेक दर्शनीय स्थल हैं और प्रत्येक स्थल की एक अनोखी विशेषता है। बेबिंगटन पॉइंट की ओर जाते हुए धूम नामक बांध जो रूकने के लिए एक अच्छा स्थान है अथवा आप पुराने महाबलेश्वर और प्रसिद्ध पंच गंगा मन्दिर जा सकते हैं , जहाँ पाँच नदियों का झरना है : कोयना , वैना , सावित्री , गायित्री और पवित्र कृष्णा नदी।
समुद्र तल से 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह महाराष्ट्र का सबसे अधिक ऊँचाई वाला लोकप्रिय व खूबसूरत पर्वतीय स्थल है।महाबलेश्वर की हरियाली से लबालब मनोरम दृश्यावलियाँ , पर्यटक को स्वप्नलोक में विचरण करने को विवश कर देती हैं । हरे-भरे मोड़ों वाली घुमावदार सड़कों पर से आप जैसे-जैसे महाबलेश्वर की ओर बढ़ेंगे , वैसे-वैसे हवा की ताजगी व ठंडक महसूस कर आप अपनी शहरी थकान और चिन्ताओं को भूल जाएँगे।
महाबलेश्वर जाने का असली मजा अपना वाहन लेकर जाने में है क्योंकि वहाँ स्थित 30 दर्शनीय स्थल देखने के लिए बस काम नहीं आती ।
*महाबलेश्वर कहाँ है ----*
महाबलेश्वर मुंबई से 247, पुणे से 120 , औरंगाबाद से 348 , पणजी से 430 कि.मी. दूर है।
महाबलेश्वर में देखने योग्य लगभग 30 पॉइंट हैं ।
एलाफिस्टन पॉइंट , माजोरी पॉइंट , सावित्री पॉइंट , आर्थर पॉइंट , विल्सन पॉइंट , हेलन पॉइंट , नाथकोंट , लाकविग पॉइंट , बॉम्बे पार्लर , कर्निक पॉइंट और फाकलेंड पॉइंट वादियों का नजारा देखने के लिए आदर्श जगहें हैं।
महाबलेश्वर के दर्शनीय स्थानों में लिंगमाला वाटर फाल , वेन्ना लेक , पुराना महाबलेश्वर मन्दिर प्रमुख हैं। भिलर टेबललैंड , मेहेर बाबा गुफाएँ , कमलगर किला और हेरिसन फोली भी दर्शनीय हैं।
प्रतापगढ़ :----यह महाबलेश्वर से 24 कि.मी. दूर 900 मीटर की ऊँचाई पर है। यह उन किलों में से एक है जिसका निर्माण छत्रपति शिवाजी ने सन् 1656 में अपने निवास स्थान के लिए किया था।
पंचगनी :--- कृष्णा घाटी में दक्षिण में स्थित पंचगनी महाबलेश्वर से मात्र 19 कि.मी. दूर है। यह चारों ओर से रमणीक दृश्यों से भरपूर होने के कारण सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ टेबल टॉप या टेबल लैंड है , जहाँ अनगिनत फिल्मों के प्रेमगीतों की शूटिंग होती रहती है। यहाँ पर्वत श्रृंखला को देखना और तेज हवाओं से बात करना एक अनूठा अनुभव है ।
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