सुशील मेहता
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18 hours ago
मीन संक्रांति वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब ग्रहों का राशि परिवर्तन तो इसका व्यापक प्रभाव मनुष्यों के जीवन पर पड़ता है। सभी 09 ग्रह समय-समय पर राशि परिवर्तन करते रहते हैं। इसी में सभी ग्रहों के राजा भगवान सूर्यदेव भी है जो एक महीने के अंतराल पर एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। सालभर में कुल 12 संक्रांतियां पड़ती है। सूर्यदेव जिस राशि में भ्रमण करते हैं उस नाम से संक्राति कहा जाता है। सूर्यदेव अभी कुंभ राशि की यात्रा पर है ऐसे में यह कुंभ संक्रांति कहलाएगी। इसके बाद यानी 15 मार्च को सूर्यदेव मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे तब इस मीन संक्रांति वैसे तो सभी संक्रांतियों का विशेष महत्व होता है लेकिन मीन संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान करने पर विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। इस दिन सुबह जल्दी से उठकर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष में सूर्यदेव को आत्मा और मान-सम्मान का कारक ग्रह माना गया है इसलिए संक्रांति पर गंगा स्नान और सूर्यदेव की पूजा करने पर पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। संक्रांति के दिन में गुप्त शत्रुओं का नाश करने और मन से नकारात्मक ऊर्जा का दूर करने के लिए आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।मीन संक्रांति वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब ग्रहों का राशि परिवर्तन तो इसका व्यापक प्रभाव मनुष्यों के जीवन पर पड़ता है। सभी 09 ग्रह समय-समय पर राशि परिवर्तन करते रहते हैं। इसी में सभी ग्रहों के राजा भगवान सूर्यदेव भी है जो एक महीने के अंतराल पर एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। सालभर में कुल 12 संक्रांतियां पड़ती है। सूर्यदेव जिस राशि में भ्रमण करते हैं उस नाम से संक्राति कहा जाता है। सूर्यदेव अभी कुंभ राशि की यात्रा पर है ऐसे में यह कुंभ संक्रांति कहलाएगी। इसके बाद यानी 15 मार्च को सूर्यदेव मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे तब इस मीन संक्रांति वैसे तो सभी संक्रांतियों का विशेष महत्व होता है लेकिन मीन संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान करने पर विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। इस दिन सुबह जल्दी से उठकर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष में सूर्यदेव को आत्मा और मान-सम्मान का कारक ग्रह माना गया है इसलिए संक्रांति पर गंगा स्नान और सूर्यदेव की पूजा करने पर पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। संक्रांति के दिन में गुप्त शत्रुओं का नाश करने और मन से नकारात्मक ऊर्जा का दूर करने के लिए आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। #शुभ कामनाएँ 🙏