प्रभु श्री राम के चरणों मे नमन करके सागर वापस चला गया व प्रभु ने सहर्ष सेतु बनाने की आज्ञा वनराधीश सुग्रीव को दे दी , बाबा तुलसीदास अपने मन को समझा रहे हैं कि ज्यादा किंतु परंतु मत कर ,यह सुंदरकांड परम् कल्याणकारी कथा है, यह समस्त विघ्नों को हरने वाली व समस्त मंगलों को करने वाली है, जैसी मेरी मति थी वैसी मैंने रचना कर दी, अब सब शंका संशय को त्याग व इसका मनन कर व कल्याण को प्राप्त हो ,यही कलयुग में मुक्ति का सेतु है।
जय श्री राम
##सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩