प्रभु श्री राम से सागर विनय कर रहा है कि हे प्रभु जो आपकी आज्ञा हो वो सिर माथे पर, अग्नि बांण चलाने की भी जरूरत नही है, आप कहें कि सूख जा तो आपके इशारे मात्र से ही सूख जाऊंगा, सेना को पार जाना है तो आराम से चली जायेगी, बस इसमें आपकी बनाई हुई मर्यादा भंग होगी व मेरे को भी कोई यश नही मिलेगा, वेद पुराण आदि सब ये ही वर्णन करते हैं कि आप की आज्ञा का हर हाल में पालन करना होता है, अग्निबाण की गर्मी से सब जीवजन्तु विचलित हैं, हे प्रभु कृपया आज्ञा दीजिये ,मैं तुरन्त पालन करूँगा।
जय श्री राम
##सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩