#पौराणिक कथा
इंद्र को ब्रह्महत्या का पाप लगा था, क्योंकि उन्होंने देवताओं के गुरु विश्वरूप का वध कर दिया था, जो ब्राह्मण थे। विश्वरूप यज्ञ के दौरान छिपकर असुरों को भी आहुति दे रहे थे, जिसे इंद्र ने देवताओं के साथ कपट समझा। क्रोध में आकर इंद्र ने उनके तीनों सिर काट दिए, जिससे उन्हें ब्रह्महत्या का दोषी ठहराया गया।
विश्वरूप का कपट:- विश्वरूप एक महान ब्राह्मण थे, लेकिन उनकी माँ असुर कुल की थीं। अपनी माँ के प्रति स्नेहवश, वह यज्ञ करते समय देवताओं को आहुति देने के साथ-साथ असुरों को भी आहुति दे रहे थे।
इंद्र का क्रोध:- इंद्र ने जब यह देखा कि विश्वरूप धार्मिक आचरण की ओट में देवताओं का अपराध कर रहे हैं, तो वे क्रोधित हो गए।
सिर काटना:- क्रोध में आकर इंद्र ने फुर्ती से विश्वरूप के तीनों सिर काट दिए।
ब्रह्महत्या का पाप:- चूँकि विश्वरूप एक ब्राह्मण थे, इसलिए इंद्र द्वारा उनका वध करने से उन्हें ब्रह्महत्या का पाप लगा। इस पाप के कारण इंद्र के समस्त बल क्षीण हो गए और वे छिपकर इधर-उधर भागने लगे।
पाप का बँटवारा:- बाद में, भगवान विष्णु की सलाह पर इंद्र ने अपनी ब्रह्महत्या को चार हिस्सों में बाँट दिया, जो पृथ्वी, जल, वृक्ष और स्त्रियों ने वहन किया। इसी कारण से पृथ्वी बंजर हो गई, वृक्षों का रस विषैला हुआ, जल में झाग और फेन उत्पन्न हुए तथा स्त्रियों को रजस्वला होने का श्राप मिला।
इंद्र देव ने अपने ब्रह्महत्या के पाप का भार पृथ्वी, जल, वृक्षों और स्त्रियों में बांटा क्योंकि उन्होंने भगवान विष्णु की आज्ञा का पालन किया था, जिन्होंने इंद्र को पाप को बांटने का सुझाव दिया था। इसके बदले में, इन सभी ने इंद्र के पाप के हिस्से के साथ-साथ कुछ वरदान भी प्राप्त किए; स्त्रियों को मासिक धर्म और प्रेम का वरदान मिला, जिसके बाद से वे पाप का वह हिस्सा वहन करती हैं।
कथा का विवरण
पाप की शुरुआत:- इंद्र देव ने विश्वरूप नामक एक ब्राह्मण का वध कर दिया था, जिससे उन्हें ब्रह्महत्या का महापाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की तपस्या की।
विष्णु की सलाह:- प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इंद्र को पाप का बोझ चार भागों में बांटने का सुझाव दिया।
पाप के हिस्सेदार:- पृथ्वी, जल, वृक्ष और स्त्री ने इंद्र के पाप के हिस्से स्वीकार किए।
वरदान:-
पृथ्वी: पाप के बदले में गड्ढे स्वतः भरने का वरदान मिला, जिससे बंजर भूमि बनी।
वृक्ष: कटने के बाद पुनः बढ़ने का वरदान मिला, हालांकि उनका रस पीने योग्य नहीं रहा।
जल: जितना जल खर्च होता, उतना वापस मिलने का वरदान मिला, और पाप झाग के रूप में प्रकट हुआ।
स्त्री: मासिक धर्म का वरदान मिला, जिसके बदले में उन्हें पुरुष का आनंद उठाने का अधिकार भी मिला।
निष्कर्ष
इस कथा के अनुसार, स्त्रियों को पाप का हिस्सा देने का कारण इंद्र के पाप को बांटना था। यह स्त्री को मासिक धर्म के रूप में मिला, जिसे एक वरदान के रूप में भी देखा जाता है, और यह दर्शाता है कि स्त्रियां प्रकृति के सबसे शक्तिशाली पहलुओं में से एक हैं।