श्यामा
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हृदय में करुणा प्रेम जितनी पांवों में सूजन ,दरारें उतनी जाने कहाँ से ,बटोर लाती हैं निश्छल प्रेम जो लुटाती हैं खारे आंसू और तकलीफें कड़वाहट सारे पीती हैं जाने कैसे अंतस से फिर भी शहद सी वो मीठी हैं कुछ न सकीं जसे तानों को हंस कर टाल जाती हैं ज़िन्दगी से पूछो बतायेंगी यूँ हंस कर वो कितनी जिंदगियां बनाती हैं तपती हैं रसोई में , जलता है मन.. फिर भी बाँट प्रेम , नहीं खलता है मन.. ओढ़ लेती हैं बारिश और धूप ख़ुद छाँव बन जाती हैं फंस कर देखो जीवन लहरों में , वो नाव बन जाती है उमड़ो कभी जो उन लहरों से काम इतना करना तुम देखना ,दरारें कभी पांवों पर हों जितने, नेह उतना ,मन में उनके सस्नेह भरना तुम - भोर Please share if you like it 🙏 Join me on Instagram 👇👇👇 www.instagram.com/bhor_poems/ . . . . . . . . . . . . . . . . . . #bhor #poems #hindi #hindipoems #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😘बस तुम और मैं #💓 मोहब्बत दिल से #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट