-Manoj Chauhan
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!!मैं अकेला था!! मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था, एक मैं ही अकेला था, बाकि सारा काफिला भी उसका था, एक साथ चलने की सोच भी उसकी थी, और बाद में रास्ता बदलने का फैसला भी उसी का था!! लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺