#महाभारत
📕महाभारत को देखें तो भगवान् ने पाण्डवों के अनुकूल भी बहुत बातें कीं और प्रतिकूल भी बहुत बातें कीं | पर पाण्डवों में यह विलक्षणता थी कि उन्होंने भगवान् पर अश्रद्धा नहीं की | पाण्डवों में भीमसेन मुँहफट था, पर उसने भी भगवान् के विरुद्ध बात नहीं की | भगवान् पर श्रद्धा हो तो ऐसी हो! परन्तु दुर्योधन की भगवान् पर श्रद्धा नहीं हुई | वह भगवान् को एक चालाक, चतुर आदमी मानता था |📕
👩❤️👩पाण्डवों में यह विशेषता थी कि वे मन के विरुद्ध बात होने पर भी समझते थे कि भगवान् अपने हैं | इसी तरह हमारे मन के विरुद्ध घटना होने पर भी भगवान् अपने दीखने चाहिये |👩❤️👩
🛐* हम भगवान् के विधान को समझते नहीं | हमारे प्रतिकूल बहुत-सी बातें होती हैं, उनके पीछे भगवान् का विधान होता है, जो हमारे लिये सदा मंगलमय होता है | जैसे माँ पर विश्वास होता है, ऐसे ही भगवान् पर विश्वास होना चाहिये | माँ को भी हम मानते हैं, जानते नहीं |* भगवान् को हम मान ही सकते हैं, जान नहीं सकते | उनको मानना ही उनको जानना है | भगवान् को न मानने पर भी भगवान् में कुछ फर्क नहीं पड़ता | फर्क न मानने वाले पर पड़ता है |
वह भगवान् से लाभ नहीं उठा सकता, जबकि भगवान् को मानने वाले को विशेष लाभ होता है | कोई भगवान को माने चाहे न माने, भगवान सब पर समान कृपा करते हैं |🛐
🌍* संसार का काम करते हुए भगवान को याद रखना---इसमें संसार का काम मुख्य है, भगवान की याद गौण है | भगवान को याद रखते हुए संसार का काम करना ---इसमें भगवान की याद मुख्य है, संसार का काम गौण है |🌍
🌷इन दोनों से श्रेष्ठ बात है ---भगवान् का ही काम करना अर्थात् काम को भगवान् का ही काम समझकर करना | भगवान् का काम समझकर करने से सब समय भगवान् की याद ही मुख्य रहेगी |
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