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#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningWednesday #किसान_जीवन_रक्षक_सम्मान . गीता जी मे तीनों देवता की पुजा करना मना है.... देवताओं की पूजा करने वालों के विषय में गीता अध्याय 7 श्लोक 12-15 में तीनों गुणों यानि रजगुण श्री ब्रह्मा जी, सतगुण श्री विष्णु जी तथा तमगुण श्री शिव जी की भक्ति करने वालों के विषय में लिखा है कि जिनका ज्ञान त्रिगुणमयी माया (यानि तीनों गुणों युक्त तीनों देवताओं से मिलने वाले लाभ तक स्थिर हो चुके हैं। जो इनसे ऊपर मेरी साधना नहीं करते) द्वारा हरा जा चुका है। राक्षस स्वभाव को धारण करने वाले मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करने वाले, मूर्ख मेरी भक्ति नहीं करते। फिर गीता अध्याय 7 के ही श्लोक 20-23 में इन तीन प्रधान देवताओं (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) से अन्य देवताओं की साधना करने वालों को अल्पबुद्धि यानि मंदबुद्धि (मूर्ख) कहा है। अन्य देवताओं को मैंने (गीता ज्ञान बताने वाले ने) कुछ शक्ति दे रखी है, परंतु उन मंदबुद्धि वालों का वह फल नाशवान है। देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं। मेरे भक्त मुझे प्राप्त होते हैं। (गीता अध्याय 9 श्लोक 25 का समर्थन है।) निष्कर्ष :- यदि गीता पढने वालों ने गीता को समझा होता तो क्या पित्तर पूजा, भूत पूजा या अन्य देवताओं की पूजा करते? इससे सिद्ध हो जाता है कि हिन्दू गीता पढ़ते हैं, परंतु समझे नहीं हैं। Kisan Messiah Sant RampalJi