सुशील मेहता
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नर्मदा जयंती नर्मदा को भारत की प्रमुख नदियों में गिना जाता है हिंदू धर्म में भगवान शिव के साथ नर्मदा माता का भी वर्णन सुनने को बहुत आसानी से मिल जाता है। भगवान शिव का पुराणों व शास्त्रों में विशेष स्थान है, जिससे नर्मदा माता का महत्व भी बहुत बढ़ जाता है। अमरकंटक से प्रवाहित होने के कारण इस राज्य में नर्मदा जयंती का विशेष महत्व है। नर्मदा को भारत की प्रमुख नदियों में गिना जाता है हिंदू धर्म में भगवान शिव के साथ नर्मदा माता का भी वर्णन सुनने को बहुत आसानी से मिल जाता है। भगवान शिव का पुराणों व शास्त्रों में विशेष स्थान है, जिससे नर्मदा माता का महत्व भी बहुत बढ़ जाता है। अमरकंटक से प्रवाहित होने के कारण इस राज्य में नर्मदा जयंती का विशेष महत्व है। नर्मदा जी को गंगा के समान ही पवित्र माना जाता है। कुछ राज्यों में इनकी पूजा और पाठ बहुत बड़े स्तर पर किए जाते हैं। ऐसे में नर्मदा जयंती का इनके भक्तों के लिए विशेष स्थान है। लोग इसे नर्मदा जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। हिंदु पंचांग के अनुसार नर्मदा जयंती वर्ष के माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को उनके जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। एक समय सभी देवताओं के साथ में ब्रह्मा-विष्णु मिलकर भगवान शिव के पास आए, जो कि (अमरकंटक) मेकल पर्वत पर समाधिस्थ थे। वे अंधकासुर राक्षस का वध कर शांत-सहज समाधि में बैठे थे। अनेक प्रकार से स्तुति-प्रार्थना करने पर शिवजी ने आँखें खोलीं और उपस्थित देवताओं का सम्मान किया। देवताओं ने निवेदन किया- हे भगवन्‌! हम देवता भोगों में रत रहने से, बहुत-से राक्षसों का वध करने के कारण हमने अनेक पाप किए हैं, उनका निवारण कैसे होगा आप ही कुछ उपाय बताइए। तब शिवजी की भृकुटि से एक तेजोमय बिन्दु पृथ्वी पर गिरा और कुछ ही देर बाद एक कन्या के रूप में परिवर्तित हुआ। उस कन्या का नाम नर्मदा रखा गया और उसे अनेक वरदानों से सज्जित किया गया। #शुभ कामनाएँ 🙏