कई बार जीवन का सबसे बड़ा बोझ काम नहीं होता, बल्कि ‘मैं’ का भाव होता है। जब हम हर कार्य में कर्तापन ले लेते हैं, तो मन भारी हो जाता है, चिंता बढ़ जाती है और सब कुछ कठिन लगने लगता है।
लेकिन जैसे ही हम स्वयं को निमित्त समझते हैं और भीतर से समर्पण का भाव रखते हैं, एक अदृश्य शक्ति हमारा सहारा बन जाती है। तब कार्य करने का दबाव नहीं रहता, बल्कि यह अनुभव होता है कि हम केवल माध्यम हैं और परमात्म शक्ति हमारे द्वारा सब कुछ सहजता से करा रही है।
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