हम में से ज़्यादातर लोग यह सोचकर नहीं खाते कि हम क्या खा रहे हैं। हम वही खाते हैं जो हमारे दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाए — और जो फिट हो जाए, वह हमेशा पौष्टिक हो, ऐसा ज़रूरी नहीं। धीरे-धीरे, ये रोज़मर्रा की छोटी-छोटी पसंद हमारे सोच से ज़्यादा असर डालने लगती हैं।
भारत में आज १५–४९ वर्ष की उम्र की लगभग २४% महिलाएँ और २३% पुरुष ओवरवेट या मोटापे का सामना कर रहे हैं। बात सिर्फ़ वज़न की नहीं है—यह असंतुलन शरीर को ठीक से काम करने से भी रोकता है और पैंक्रियाटिक, कोलोरेक्टल और पेट के कैंसर जैसे कई कैंसर का ख़तरा बढ़ाता है। ये आँकड़े उन आदतों का नतीजा हैं जो हम हर दिन दोहराते हैं, क्योंकि शरीर सब याद रखता है—जिसे हम नज़रअंदाज़ करते हैं, जिस पर समझौता करते हैं, और जिसकी हम अनदेखी कर देते हैं।
पोषण सिर्फ़ थाली भरने तक सीमित नहीं है, यह उस ज़िंदगी को संभालता है जो उससे आगे चलती है। आज जो फैसले ‘छोटे’ लगते हैं, उन पर #LookAgain करें—क्योंकि वही आपके कल को आकार दे रहे हैं।
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