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IIM रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में 2026 की ग्रेजुएटिंग क्लास को संबोधित करते हुए, टाटा ट्रस्ट्स के CEO श्री सिद्धार्थ शर्मा ने टाटा के काम करने के तरीके के बारे में बात की—जहां बिज़नेस की सफलता समाज की प्रगति से जुड़ी होती है, और कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाज और आर्थिक विकास के लिए वापस लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में सिर्फ बाजार (मार्केट) अपने आप सभी बड़ी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। इसलिए ज़रूरी है कि परोपकारी संस्थाएं, बिज़नेस और समाज, सरकार के साथ मिलकर इन समस्याओं को हल करें। उन्होंने यह देखकर खुशी जताई कि इस बैच में महिलाओं की अच्छी संख्या है, क्योंकि वे कार्यस्थल पर बहुत अहम योगदान देती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे चलकर काम की जगहों पर महिलाओं की भागीदारी और भी बढ़ेगी। साथ ही, उन्होंने युवा महिलाओं को अपने करियर को आगे बढ़ाने और बेहतर व समावेशी संस्थाएं बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। ग्रेजुएट्स को काम की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने सलाह दी कि वे हमेशा जिज्ञासु रहें, अपने लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें, और एक ऐसा भविष्य बनाने में योगदान दें जो सबके लिए समान और टिकाऊ हो। और जानने के लिए: https://youtu.be/TcQnX82D2LI #Education #NationBuilding #Growth #ThoughtLeadership #SDG4 #TataTrusts
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कुपोषण हमेशा भूख जैसा नहीं दिखता। यह उन बच्चों में दिखता है जो अपनी उम्र के हिसाब से छोटे रह जाते हैं, जल्दी वजन कम कर लेते हैं या बार-बार बीमार पड़ते हैं। जब ये संकेत आम हो जाते हैं और बच्चों की बढ़त पर नज़र नहीं रखी जाती, तो कुपोषण अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। जीवन के पहले तीन सालों में बच्चों की लंबाई रुकने (स्टंटिंग) का खतरा तेजी से बढ़ता है—यह एक अहम समय होता है, जब सही पोषण न मिलने से बच्चे की शारीरिक बढ़त, दिमागी विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर स्थायी असर पड़ सकता है। वेस्टिंग (अत्यधिक दुबलापन) ज्यादा तुरंत असर दिखाता है। बीमारी और सही आहार की कमी से बच्चा जल्दी खतरनाक रूप से कमजोर हो सकता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी बन सकता है। अंडरवेट इन दोनों का संकेत है और लंबे समय से चल रहे कुपोषण को दर्शाता है। समय के साथ कुपोषण की स्थिति समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मापदंड है। कुपोषण सिर्फ थाली में खाने की कमी नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि खाना बच्चे की उम्र के अनुसार हो, हल्का लेकिन पोषक हो, बार-बार खिलाया जाए, और साफ-सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं की सही सुविधा मिले। मातृ और शिशु स्वास्थ्य तथा सामुदायिक पोषण में लगातार काम के जरिए, टाटा ट्रस्ट्स कुपोषण के मूल कारणों को दूर करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि रोकथाम वहीं से शुरू होती है जहाँ यह दिखना शुरू भी नहीं हुआ होता। #StuntingAndWasting #Underweight #Simplified #LearnWithUs #Malnutrition #SDG4 #TataTrusts
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भारत भर में महिलाएं हमेशा पानी के सबसे करीब रही हैं—उसे घर तक लाना, हर ज़रूरत के हिसाब से संभालकर इस्तेमाल करना, और यह समझना कि हर बूंद को कैसे लंबे समय तक चलाया जाए। अब यही जुड़ाव समुदायों में पानी को समझने और संभालने का तरीका तय कर रहा है। जब वे पानी की उपलब्धता को परखती हैं, उसके इस्तेमाल को दिशा देती हैं और आने वाले समय के लिए योजना बनाती हैं, तब पानी सिर्फ इस्तेमाल होने वाली चीज़ नहीं रह जाता—बल्कि एक ऐसा संसाधन बन जाता है जिसे समझदारी से संभाला और सुरक्षित किया जाता है। तो अगर सवाल है #WaterWeBudgeting, तो जवाब उन्हीं से शुरू होता है जो हमेशा हर बूंद की कीमत समझती आई हैं। और जानने के लिए: https://tatatrusts.org/world-water-day #WaterWeBudgeting #WorldWaterDay #WaSH #WaterSustainability #SDG6 #TataTrusts
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