TataTrusts
163 Posts • 28K views
Tata Trusts
568 views
भारत में हॉकी का इतिहास हिम्मत, मेहनत और कभी हार न मानने की कहानी है। गाँव के मैदानों से लेकर ओलंपिक के बड़े मंच तक, हर खिलाड़ी अपने साथ पिछले खिलाड़ियों की विरासत और पूरे देश के सपने लेकर चलता है। हर कदम के साथ यह कहानी आगे बढ़ती रहती है। इस सफर में जमशेदपुर की नवल टाटा हॉकी एकेडमी (NTHA) मजबूती से खड़ी है। यह सिर्फ एक एकेडमी नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी का एक जीवित अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। यहाँ वे युवा खिलाड़ी आते हैं जिनका सपना राष्ट्रीय जर्सी पहनकर देश का नाम रोशन करना है। इसका जमीनी स्तर का हॉकी कार्यक्रम कम उम्र में ही प्रतिभाशाली बच्चों को पहचानता है और उन्हें आगे बढ़ने, खेलने और बेहतरीन बनने का मौका देता है। यह छात्रों को नियमित और सही तरीके से खेल में भाग लेने का अवसर भी देता है, जिससे वे अच्छी आदतें सीखते हैं और खेल से जीवनभर जुड़ाव महसूस करते हैं। बेहतरीन सुविधाओं और भारत को विश्व हॉकी में आगे देखने के लक्ष्य के साथ, नवल टाटा हॉकी एकेडमी आने वाले कल के सितारों को तैयार कर रही है—एक खिलाड़ी, एक सपना और एक जीत के साथ। भारतीय हॉकी का अगला अध्याय यहीं से शुरू होता है। नवल टाटा हॉकी एकेडमी के बारे में अधिक जानने के लिए, दिए गए लिंक पर जाएँ: https://www.tatatrusts.org/our-stories/article/zid-hona-chahiye #BuiltOnTrust #NavalTataHockeyAcademy #TataLegacy #SportsForDevelopment #TataTrusts
12 likes
6 shares
Tata Trusts
542 views
नशे की शुरुआत ज़रूरी नहीं कि किसी बड़े संकट से हो। कई बार यह एक ‘छोटी-सी’ राहत से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है। विज्ञान पहले ही बता चुका है कि शराब और तंबाकू जैसे पदार्थ रोके जा सकने वाले कैंसर के बड़े कारणों में से हैं। अकेला तंबाकू ही मुँह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर से जुड़ा है। वहीं शराब इन ख़तरों को और बढ़ा देती है—जिससे अन्ननली, लिवर, कोलन, रेक्टम और स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ता है। ये फैसले अक्सर सिर्फ़ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते। इसलिए #LookAgain। टाटा ट्रस्ट्स हर किसी से अपील करते हैं कि आज जो आदतें छोटी लगती हैं, उन्हें पहचानें—क्योंकि उनके नतीजे कभी छोटे नहीं होते। #WorldCancerDay #CancerSeJeetnaSambhavHai #CancerCare #FightCancer #SDG3 #TataTrusts
14 likes
13 shares
Tata Trusts
521 views
हम में से ज़्यादातर लोग यह सोचकर नहीं खाते कि हम क्या खा रहे हैं। हम वही खाते हैं जो हमारे दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाए — और जो फिट हो जाए, वह हमेशा पौष्टिक हो, ऐसा ज़रूरी नहीं। धीरे-धीरे, ये रोज़मर्रा की छोटी-छोटी पसंद हमारे सोच से ज़्यादा असर डालने लगती हैं। भारत में आज १५–४९ वर्ष की उम्र की लगभग २४% महिलाएँ और २३% पुरुष ओवरवेट या मोटापे का सामना कर रहे हैं। बात सिर्फ़ वज़न की नहीं है—यह असंतुलन शरीर को ठीक से काम करने से भी रोकता है और पैंक्रियाटिक, कोलोरेक्टल और पेट के कैंसर जैसे कई कैंसर का ख़तरा बढ़ाता है। ये आँकड़े उन आदतों का नतीजा हैं जो हम हर दिन दोहराते हैं, क्योंकि शरीर सब याद रखता है—जिसे हम नज़रअंदाज़ करते हैं, जिस पर समझौता करते हैं, और जिसकी हम अनदेखी कर देते हैं। पोषण सिर्फ़ थाली भरने तक सीमित नहीं है, यह उस ज़िंदगी को संभालता है जो उससे आगे चलती है। आज जो फैसले ‘छोटे’ लगते हैं, उन पर #LookAgain करें—क्योंकि वही आपके कल को आकार दे रहे हैं। #WorldCancerDay #CancerSeJeetnaSambhavHai #FightCancer #SDG3 #TataTrusts
10 likes
14 shares