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एक न्यायपूर्ण समाज की बुनियाद इस विश्वास पर टिकी होती है कि हर व्यक्ति को दूसरा मौका मिलना चाहिए। Prayas-TISS को सहयोग देकर टाटा ट्रस्ट्स महाराष्ट्र और गुजरात की जेल व्यवस्थाओं में प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति को मजबूत कर रहे हैं। इससे हिरासत में रह रही महिलाओं और युवाओं, कानून से टकराव में आए बच्चों, और व्यावसायिक यौन शोषण से बाहर आ रही या बेघर और असहाय महिलाओं को व्यवस्थित सामाजिक-कानूनी और पुनर्वास सहायता मिल रही है, ताकि वे अपनी जिंदगी फिर से संवार सकें। साथ ही, न्याय संविधान फेलोशिप के माध्यम से ट्रस्ट्स कर्नाटक और बिहार के वंचित समुदायों में अनुभवी वकीलों को नियुक्त कर रहे हैं। ये वकील संवैधानिक अधिकारों को जमीनी स्तर पर आम लोगों तक पहुंचाकर उन्हें रोजमर्रा की कानूनी मदद दे रहे हैं। ये पहलें सिर्फ सेवाएं नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सहारा हैं। इन प्रयासों से संवैधानिक अधिकार लोगों की वास्तविक जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं, समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और न्याय उन तक पहुंच रहा है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। संरचित सहायता और पुनर्वास के अवसर देकर टाटा ट्रस्ट्स वंचित समुदायों में उम्मीद जगा रहे हैं और एक सच्चे अर्थों में समावेशी समाज बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। #WorldDayofSocialJustice #Development #SocialGood #SDG16 #TataTrusts
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मुंबई क्लाइमेट वीक के पहले आयोजन में अपने कीनोट भाषण के दौरान, टाटा ट्रस्ट्स के सी.ई.ओ सिद्धार्थ शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हम रोज़ जो छोटे-छोटे फैसले लेते हैं, वही हमारे शहरों का भविष्य तय करते हैं। तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के बीच, हमारी सड़कें, घर, सार्वजनिक जगहें और बुनियादी ढाँचा ही तय करेंगे कि हमारे शहर गर्मी, प्रदूषण और जलवायु से जुड़े ख़तरों का सामना कितनी मजबूती से कर पाते हैं—और क्या वे सभी के लिए रहने लायक और बराबरी वाले बने रह सकते हैं। उन्होंने ऐसे व्यावहारिक और लोगों को केंद्र में रखने वाले समाधानों की बात की, जिनमें बराबरी, सुरक्षा और मज़बूती को शहर की योजना का हिस्सा बनाया जाए—ताकि जलवायु की चुनौतियाँ एक बेहतर और स्वस्थ समुदाय बनाने का मौका बन सकें। शहरों के लिए उनके इस विज़न को विस्तार से सुनने के लिए, देखें: https://youtu.be/0uOqqeTradE #MumbaiClimateWeek #ClimateAction #InclusiveGrowth #Development #MakingAnImpact #TataTrusts
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नशे की शुरुआत ज़रूरी नहीं कि किसी बड़े संकट से हो। कई बार यह एक ‘छोटी-सी’ राहत से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है। विज्ञान पहले ही बता चुका है कि शराब और तंबाकू जैसे पदार्थ रोके जा सकने वाले कैंसर के बड़े कारणों में से हैं। अकेला तंबाकू ही मुँह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर से जुड़ा है। वहीं शराब इन ख़तरों को और बढ़ा देती है—जिससे अन्ननली, लिवर, कोलन, रेक्टम और स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ता है। ये फैसले अक्सर सिर्फ़ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते। इसलिए #LookAgain। टाटा ट्रस्ट्स हर किसी से अपील करते हैं कि आज जो आदतें छोटी लगती हैं, उन्हें पहचानें—क्योंकि उनके नतीजे कभी छोटे नहीं होते। #WorldCancerDay #CancerSeJeetnaSambhavHai #CancerCare #FightCancer #SDG3 #TataTrusts
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