सबसे यादगार यात्राएँ जगहों से नहीं, लोगों से बनती हैं। जब सफ़र सिर्फ़ देखने तक सीमित न रहकर लोगों की ज़िंदगी, उनकी संस्कृति और कहानियों से जुड़ता है, तभी किसी जगह की असली पहचान सामने आती है।
इस #नेशनल टूरिज़्म डे, हम ऐसे टूरिज़्म को सेलिब्रेट करते हैं जो सिर्फ़ एक्सप्लोर करने से आगे बढ़कर लोगों, संस्कृति और उन्हें सहारा देने वाले इकोसिस्टम से जुड़ता है। ऐसा सफ़र हमें नई सोच देता है और यह भी सिखाता है कि यात्रा ज़िम्मेदारी के साथ कैसे की जाए।
इस आपसी जुड़ाव में, ट्रैवल एक साझा अनुभव बन जाता है—जहाँ स्थानीय समुदाय अपनी आजीविका बना सकते हैं, अपनी विरासत को संभाल सकते हैं और अपने इलाक़ों की जैव-विविधता की रक्षा कर सकते हैं।
टाटा ट्रस्ट्स ऐसे ही सफ़रों का समर्थन करते हैं, जो भागीदारी और साझा प्रगति पर आधारित हों—ताकि हम मिलकर एक ज़्यादा समावेशी भविष्य बना सकें।
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कम उम्र से ही कई लड़कियों की पहचान उनके लिए तय कर दी जाती है—उम्मीदों, भूमिकाओं और धारणाओं के ज़रिये—ठीक उसी वक्त जब वे खुद को समझना शुरू ही करती हैं।
यहीं शिक्षा एक बड़ा बदलाव लाती है। यह लड़कियों को सवाल करने, चीज़ें समझने और तयशुदा दायरों से आगे खुद को देखने की जगह देती है।
अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (ई.सी.ई) और इंटीग्रेटेड अप्रोच टू टेक्नोलॉजी इन एजुकेशन (आई.टी.ई) जैसी पहलों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स बचपन से लेकर किशोरावस्था तक सीखने की पूरी यात्रा को मज़बूत बनाने पर काम करते हैं—ताकि लड़कियाँ अलग तरह से सोच सकें, बेहतर सीख सकें और सीखने का अनुभव उनके लिए मायने रखे। मेनस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर समझ बढ़ाकर और पीरियड्स को सेहत का एक सामान्य संकेत मानने वाली बातचीत को आगे बढ़ाकर, ट्रस्ट्स लड़कियों को खुद को समझने, स्वीकार करने और अपनी पहचान पर भरोसा करने में मदद करते हैं।
इन्हीं कोशिशों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स ऐसे माहौल बना रहे हैं जहाँ लड़कियाँ बिना किसी पूर्वाग्रह के, अपनी पहचान खुद गढ़ना सीख सकें।
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भारत में ब्रिटिश राज के समय जन्मे सर रतन टाटा आज़ादी की लड़ाई से दूर नहीं थे। न्याय के लिए खड़े होने और देश के काम आने का जो विश्वास उनके भीतर था, उसी ने उन्हें भारत की स्वतंत्रता की यात्रा में एक शांत लेकिन अहम भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बनाया। उनके इस योगदान को मानते हुए महात्मा गांधी ने उनकी उदारता का ज़िक्र किया और लिखा कि इससे आंदोलन को नई ताक़त मिली।
देशभक्त होने के साथ-साथ सर रतन टाटा कला और विरासत के भी बड़े क़द्रदान थे। पाटलिपुत्र में हुई पहली पुरातात्विक खुदाई को उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया—जिससे अशोक के सिंहासन कक्ष की खोज संभव हो पाई।
आज उनकी जयंती पर, समाज के प्रति ज़िम्मेदारी के रूप में परोपकार में उनका विश्वास हमें याद दिलाता है कि देने की सोच कितनी दूर तक असर डाल सकती है। यही सोच आज भी टाटा ट्रस्ट्स के काम को दिशा देती है, जो पूरे देश में समुदायों को सशक्त बना रहे हैं।
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पिछले सौ सालों से भी ज़्यादा समय से, जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप भारत के सबसे होनहार छात्रों को आगे बढ़ने का मौका देती आ रही है—ताकि वे अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई कर सकें और अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच सकें।
जमशेदजी एन. टाटा का मानना था कि अगर देश को अच्छे लीडर्स, चेंजमेकर्स और एक्सपर्ट्स चाहिए, तो सबसे ज़रूरी है सबसे प्रतिभाशाली और काबिल लोगों को सही सपोर्ट देना—ताकि वे देश के लिए कुछ बड़ा कर सकें।
जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप (२०२६–२०२७) के लिए आवेदन अब खुले हैं।
आवेदन की आख़िरी तारीख़: १५ मार्च, २०२६
ज़्यादा जानकारी के लिए, यहाँ विज़िट करें: https://jntataendowment.org/
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युवा की सोच एक ऐसी शक्ति है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। वे प्रगति को आगे बढ़ाने वाले होते हैं—आज पर सवाल उठाते हैं और कल की कल्पना करते हैं।
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा ही वह शक्ति रखते हैं जो एक राष्ट्र का रूप गढ़ सकती है, आदर्शों को इरादों में बदल सकती है और साहस को परिवर्तन की दिशा में मोड़ सकती है। यही विश्वास है जो उनके जन्मदिवस को #नेशनल यूथ डे बनाता है।
सदी पहले, जमशेदजी एन. टाटा ने भी एक समान विश्वास साझा किया—भारतीय छात्रों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना। आज, ‘द जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप’ जैसी पहलों के माध्यम से, ट्रस्ट्स उनके विज़न को जीवित रखते हुए भारत के युवाओं के लिए अवसर खोल रहे हैं।
इस #नेशनल यूथ डे, अपने शैक्षणिक सफर का अगला कदम उठाएँ ‘जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप’ के साथ।
स्प्रिंग २०२६–फॉल २०२७ के लिए आवेदन अब खुले हैं।
#NationalYouthDay #YouthOfToday #YouthEmpowerment #Opportunities #TataTrusts
कुछ विचार ऐसे होते हैं जो केवल अपने समय तक सीमित नहीं रहते—वे जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं, लंबे समय तक।
१८९२ में, जमशेदजी एन. टाटा ने ऐसे ही एक विचार की परिकल्पना की—जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप।
उनका मानना था कि जब भारतीय छात्रों को सही सहयोग मिलता है, तो वे केवल अपना करियर नहीं बनाते, बल्कि उन प्रणालियों को भी मज़बूत करते हैं जो देश का भविष्य गढ़ती हैं।
जे.एन. टाटा एंडोमेंट लोन स्कॉलरशिप इसी विश्वास को आगे बढ़ाते हुए साइंस (एप्लाइड, प्योर और सोशल), लॉ, मैनेजमेंट, कॉमर्स, आर्ट और आर्किटेक्चर जैसे विषयों में विदेश में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों का समर्थन करती है।
यदि आप पहला कदम उठाने के लिए तैयार हैं, तो यह आपकी शुरुआत हो सकती है।
स्प्रिंग २०२६–फॉल २०२७ के लिए आवेदन अब खुले हैं।
अधिक जानकारी के लिए: https://jntataendowment.org/
#JNTataEndowment #Scholarships2026 #StudyAbroad #LoanScholarship #NationBuilding #Heritage #HigherEducation #Youth #Legacy #Scholarship #Excellence #Scholars #TataTrusts
हर नया साल सपनों को हक़ीक़त में बदलने का मौका होता है, और संवेदनशीलता को असर में ढालने का भी। २०२६ में कदम रखते हुए, अब तक हुई हमारी बातचीत हमें ऐसे नए विचारों की ओर ले जाए, जो भविष्य को आकार दें और एक मज़बूत, ज़्यादा समावेशी भारत का निर्माण करें—जहाँ हर कदम पर एक-दूसरे की परवाह हो।
टाटा ट्रस्ट्स की ओर से आपको उद्देश्य, करुणा और सार्थक बदलाव से भरे नए साल की शुभकामनाएँ।
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साल 2025 उन बातचीतों के नाम रहा जो मायने रखती थीं—ऐसी संवाद जिन्होंने प्रगति को दिशा देने वाले अहम विचारों को सामने रखा।
हमारे आसपास मौजूद माध्यमों से प्रेरित होकर—जिस तरह हम स्क्रॉल करते हैं, जुड़ते हैं और रुककर सोचते हैं—हमने इन विचारों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नए तरीके से पेश किया, कई बार वहाँ जहाँ उनकी उम्मीद नहीं होती। ये संदेश इसलिए असरदार बने क्योंकि आपने इन्हें साझा किया, इन पर चर्चा की और आगे बढ़ाया।
साल के अंत के साथ, टाटा ट्रस्ट्स इस संवाद को और आगे बढ़ाएगा—और ज़्यादा आवाज़ों को जोड़कर, आने वाले समय को मिलकर आकार देगा। और जो लोग हमारे साथ जुड़े रहे, हिस्सा बने और इन बातचीतों को आगे बढ़ाते रहे—हम उनका दिल से धन्यवाद करते हैं।
ये बातचीतें जारी रहेंगी—और और भी गहरी, व्यापक और अर्थपूर्ण बनेंगी—क्योंकि आप इसका हिस्सा हैं।
#TransformTomorrow #EmpowerChange #NewYear2026 #TataTrusts
आशा की कहानियाँ: स्वास्थ्य और उम्मीद की नई शुरुआत
नेल्लोर के दिहाड़ी मज़दूर नागराजू को जब फेफड़ों के एक दुर्लभ ट्यूमर का पता चला, तो उनके परिवार को सबसे बुरे का डर सताने लगा। जीवनरक्षक सर्जरी का खर्च उठाने की कोई क्षमता नहीं थी, और उम्मीद बहुत दूर लग रही थी—तभी तिरुपति स्थित SVICCAR के माध्यम से टाटा ट्रस्ट्स ने सहयोग किया।
संवेदनशील देखभाल और आर्थिक सहायता के ज़रिये, नागराजू न केवल इस बीमारी से उबर पाए, बल्कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी दोबारा हासिल की। आज वे एक उज्ज्वल और आशाजनक भविष्य की ओर देख रहे हैं।
और पढ़ें आशा की कहानियाँ, हमारी वार्षिक रिपोर्ट में।
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मज़बूती और दृढ़ता विकसित करना, राष्ट्र निर्माण के प्रति टाटा ट्रस्ट्स की प्रतिबद्धता का मूल है। SAFER Hills पहल के माध्यम से, टाटा ट्रस्ट्स भारतीय हिमालयी क्षेत्र में आपदा तैयारी और समुदाय-केंद्रित नवाचार को सशक्त बनाने के लिए IIT मंडी के साथ साझेदारी कर रहे हैं।
मंडी और हिमाचल प्रदेश के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुई तबाही इस बात की याद दिलाती है कि यह क्षेत्र लगातार किन जोखिमों का सामना कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य उन्नत शोध सुविधाएँ विकसित करना, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में जलवायु-जनित आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए टिकाऊ तकनीकी समाधान तैयार करना है।
इस सहयोग के माध्यम से, टाटा ट्रस्ट्स आधुनिक आपदा प्रबंधन के तरीकों को आगे बढ़ाने और पूरे भारत में समुदायों व पारिस्थितिक तंत्रों के लिए विस्तार योग्य समाधान विकसित करने का लक्ष्य रखते हैं।
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