Jeet Singh
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#❤️जीवन की सीख #🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ #✔️राष्ट्रीय लोक दल #🧹आम आदमी पार्टी🕴 #✔️राष्ट्रीय जनता दल >>> #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ <<< मैने जो प्रस्ताव रखा है, उससे वास्तव में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संतुलन आएगा: 1. सभी राजनीतिक दल (जिन्होंने कभी भी किसी राज्य या केंद्र में सरकार बनाई हो) इसमें शामिल हों। 2. प्रत्येक दल से एक-एक प्रतिनिधि आए। 3. मतदान गुप्त मतपत्र (ballot paper) से हो, ताकि दबाव न बने। 4. वोटिंग और गिनती CJI की देखरेख में तुरंत हो जाए। 5. CJI केवल पर्यवेक्षक हों, उन्हें मतदान का अधिकार न मिले। --- 🎯 इस प्रक्रिया से फायदे: नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का कब्ज़ा नहीं रहेगा। हर बड़े दल की भागीदारी से सहमति आधारित CEC चुना जाएगा। गुप्त मतदान से दल-बदल या दबाव का खतरा नहीं रहेगा। जनता का भरोसा बढ़ेगा कि चुनाव आयोग सचमुच स्वतंत्र है। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> 📜 प्रस्तावित कानून प्रारूप “मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति एवं सेवा शर्तें) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “चुनाव आयुक्त नियुक्ति (पारदर्शिता एवं निष्पक्षता) अधिनियम” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “CEC” का अर्थ होगा – मुख्य चुनाव आयुक्त। 2. “चुनाव समिति” का अर्थ होगा – सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के प्रतिनिधियों की समिति। 3. “CJI” का अर्थ होगा – भारत के मुख्य न्यायाधीश। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना 1. प्रत्येक राष्ट्रीय दल और प्रत्येक ऐसा राज्य स्तरीय दल जिसने कम से कम एक बार किसी राज्य में सरकार बनाई हो, उससे एक-एक प्रतिनिधि नियुक्ति समिति में होगा। 2. समिति की बैठक भारत के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में होगी। 3. मुख्य न्यायाधीश केवल पर्यवेक्षक (Observer) होंगे, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नियुक्ति की प्रक्रिया 1. सभी योग्य उम्मीदवारों की सूची समिति को प्रस्तुत की जाएगी। 2. समिति के सभी सदस्य गुप्त मतपत्र (Secret Ballot) से मतदान करेंगे। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त होगा। 4. यदि दो या अधिक उम्मीदवार बराबर मत पाते हैं, तो पुनः मतदान होगा। --- धारा 5 – पारदर्शिता उपाय 1. मतदान की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी समिति सदस्य पर दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव का प्रयास दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 6 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक रहेगा। 2. हटाने की प्रक्रिया वही होगी जो वर्तमान में संविधान (अनुच्छेद 324) के तहत निर्धारित है। --- धारा 7 – विशेष प्रावधान 1. यदि किसी राष्ट्रीय या राज्यीय दल का प्रतिनिधि उपलब्ध न हो, तो उसकी अनुपस्थिति के बावजूद मतदान की प्रक्रिया चलेगी। 2. समिति की कार्यवाही का कोरम कम से कम 2/3 होना चाहिए। --- निष्कर्ष इस विधेयक से – चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का नियंत्रण नहीं होगा और जनता का भरोसा सुनिश्चित होगा। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<<<< >>> #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ <<< 📜 “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) अधिनियम, 20XX” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “समिति” का अर्थ होगा – नियुक्ति समिति (Appointment Committee) जो इस अधिनियम के अंतर्गत गठित होगी। 2. “ADR” का अर्थ होगा – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स या संसद द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष संस्था। 3. “गुप्त मतदान” का अर्थ होगा – ऐसा मतदान जिसमें मतदाता की पहचान सार्वजनिक न हो। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना समिति में कुल 7 सदस्य होंगे: 1. 2 वरिष्ठ वकील – एक बार काउंसिल ऑफ इंडिया से, एक राज्य बार काउंसिल से। 2. 2 सेवानिवृत्त न्यायाधीश – (सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट से, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद न मिला हो)। 3. 2 स्वतंत्र संस्थान प्रतिनिधि – (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और लोकपाल)। 4. 1 ADR प्रतिनिधि – (या संसद द्वारा नामित कोई समकक्ष संस्था)। 👉 केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि केवल पर्यवेक्षक (Observer) होगा, उसे मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नामांकन प्रक्रिया 1. योग्य उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। 2. ADR, मीडिया और नागरिक समाज आपत्तियाँ/फीडबैक दर्ज कर सकते हैं। 3. समिति सभी नामों की पारदर्शी जाँच करेगी (मेरिट, ईमानदारी, केस हिस्ट्री)। --- धारा 5 – चयन की प्रक्रिया 1. समिति गुप्त मतदान (Secret Ballot) से चयन करेगी। 2. निर्णय न्यूनतम 4/7 बहुमत से होगा। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार न्यायाधीश नियुक्त होगा। 4. टाई की स्थिति में पुनः मतदान होगा। --- धारा 6 – पारदर्शिता उपाय 1. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी प्रकार का दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 7 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. नियुक्त न्यायाधीश संविधान के अनुच्छेद 124 एवं 217 में वर्णित कार्यकाल तक पद पर रहेंगे। 2. उन्हें हटाने की प्रक्रिया केवल संसद के 2/3 बहुमत + समिति की सहमति से ही होगी। 3. सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीश को कोई भी सरकारी पद (राज्यपाल, आयोग, ट्रिब्यूनल इत्यादि) नहीं दिया जाएगा। --- धारा 8 – विशेष प्रावधान 1. यदि समिति का कोई सदस्य उपलब्ध न हो, तो शेष सदस्यों की उपस्थिति में कार्यवाही होगी, बशर्ते कम से कम 5 सदस्य उपस्थित हों। 2. समिति की कार्यवाही का रिकॉर्ड सार्वजनिक पोर्टल पर सारांश रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। --- 🔑 निष्कर्ष इस विधेयक से – जजों की नियुक्ति पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। सरकार का नियंत्रण समाप्त होगा। ADR और स्वतंत्र संस्थाओं के जुड़ने से जनता का विश्वास बढ़ेगा। छोटे आकार की समिति होने से प्रक्रिया तेज़ और प्रभावी होगी।