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2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो
1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है
2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है
3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए
4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना
5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने
6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी
7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी
8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना
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राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है
देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर
जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है
जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा
Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के।
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आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए
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विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है
नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा