sn vyas
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28 days ago
#महाभारत #जय श्री कृष्ण अर्जुन का धनुष हाथ में था, पर मन के भीतर हलचल थी। सामने खड़े थे वही लोग — जिनके साथ बचपन खेला था, जिनसे गुरु का ज्ञान पाया था, जिनके चरण छूकर हर युद्ध में उतरा था। अर्जुन ने भारी स्वर में कहा — “केशव… सामने अपने ही हैं।” 💯🔥 श्रीकृष्ण मुस्कराए। वो मुस्कान, जिसमें करुणा भी थी और कठोर सत्य भी। धीरे से बोले — “अगर अपने हैं अर्जुन, तो फिर सामने क्यों खड़े हैं?” क्षण भर को समय थम गया। कृष्ण आगे बोले — “अपने वो होते हैं, जो धर्म के साथ खड़े हों। जो अन्याय के खिलाफ़ हों। जो सच के लिए खड़े हों… भले ही अकेले क्यों न हों।” “और जो अधर्म के साथ खड़े हों अर्जुन, चाहे वो खून के रिश्ते हों, गुरु हों या भाई — वो सामने ही होते हैं।” अर्जुन की आँखों में संकोच था, पर मन में धीरे-धीरे स्पष्टता उतर रही थी। कृष्ण ने कहा — “युद्ध रिश्तों से नहीं लड़ा जाता, युद्ध धर्म से लड़ा जाता है।” “अगर तू आज पीछे हटा, तो जीत अधर्म की होगी। और याद रख अर्जुन — धर्म के साथ खड़ा होना सबसे बड़ा अपनापन है।” अर्जुन ने गहरी साँस ली, धनुष कसकर थामा… और समझ गया — जो अपने होते हैं, वो कभी सामने नहीं होते। वो हमेशा साथ खड़े होते हैं। 🔥🙏