#जय श्री राम #जय श्री हनुमान
🌺 राम और हनुमान: वह कथा जो शब्दों में कम, हृदय में अधिक उतरती है 🌺
वनवास का समय था।
एक दिन प्रभु श्रीराम मौन बैठे थे। न धनुष हाथ में था, न मुस्कान चेहरे पर। आँखों में गहराई थी—जैसे कोई भारी विचार भीतर उतर गया हो।
हनुमान जी दूर खड़े यह सब देख रहे थे।
उन्होंने कुछ नहीं पूछा…
क्योंकि भक्त प्रश्न नहीं करता, वह भाव पढ़ता है।
धीरे-धीरे वे प्रभु के पास आए, बिना कोई शब्द बोले, उनके चरणों में बैठ गए।
न प्रणाम किया, न कुछ कहा—
बस वहीं बैठ गए।
काफी समय बीत गया।
तभी प्रभु श्रीराम ने पूछा—
“हनुमान, तुम कुछ कहना चाहते हो?”
हनुमान जी ने सिर उठाया, आँखों में करुणा थी और बोले—
“प्रभु, आज आपने मुझे याद नहीं किया…
इसलिए मैं खुद आ गया।”
यह सुनकर श्रीराम की आँखें भर आईं।
वे बोले—
“हनुमान, आज मैं सोच रहा था कि जब यह लीला समाप्त होगी,
तो संसार मुझे भगवान कहेगा…
पर तुम्हें क्या मिलेगा?”
हनुमान जी मुस्कुराए।
वह मुस्कान किसी तपस्वी की नहीं,
किसी माँ के बेटे की थी।
उन्होंने कहा—
“प्रभु, मुझे कुछ नहीं चाहिए।
बस जब भी कोई मुझे देखे,
तो उसे आप याद आ जाएँ—
यही मेरा पुरस्कार है।”
यह सुनकर प्रभु श्रीराम ने पहली बार
किसी भक्त के सिर पर हाथ रखा।
और कहा—
“हनुमान,
आज से जो मुझे पूजेगा,
वह पहले तुम्हें पाएगा।
क्योंकि मेरी भक्ति का रास्ता
तुम्हारे चरणों से होकर गुजरता है।”
कहते हैं—
उस दिन के बाद राम भगवान हुए,
लेकिन हनुमान भक्ति बन गए।
🌸 इस कहानी का भाव 🌸
राम मर्यादा हैं
हनुमान समर्पण हैं
और जहाँ समर्पण होता है,
वहाँ भगवान को झुकना ही पड़ता है 🙏
🚩राम भक्त हनुमान जी की जय 🚩