#जय श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम केवल एक युग के नायक नहीं हैं, वे हर युग के लिए जीवन जीने की विधा हैं। जब-जब जीवन में असमंजस आता है, जब कर्तव्य और भावनाएँ आमने-सामने खड़ी हो जाती हैं, तब राम का स्मरण हमें भीतर से स्थिर कर देता है।
राम का सबसे बड़ा गुण है — सहनशीलता और धैर्य।
राज्य, वैभव और अधिकार सब कुछ होते हुए भी माता कैकेयी की आज्ञा को शिरोधार्य कर चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार करना कोई साधारण निर्णय नहीं था। समुद्र के तट पर खड़े होकर पहले विनय, फिर तप और अंततः कर्म के मार्ग से सेतु निर्माण — यह सिखाता है कि अधीरता नहीं, धैर्य ही विजय का आधार है। सीता माता के पृथक हो जाने के बाद भी राजा होकर संन्यासी-सा जीवन जीना, अपने दुःख को कर्तव्य से छोटा मानना — यही राम की सहनशीलता की पराकाष्ठा है।
राम दयालु स्वामी हैं।
उनकी छत्रछाया में भेद नहीं, केवल भाव है। मानव हों या वानर, मित्र हों या शरणागत — सबको उन्होंने समान स्नेह दिया। केवट का प्रेम, निषादराज की मित्रता, सुग्रीव का विश्वास और विभीषण का शरणागति भाव — राम ने हर रिश्ते को मर्यादा के साथ निभाया। हनुमान, जाम्बवंत, नल-नील जैसे पात्रों को समय-समय पर नेतृत्व देना बताता है कि सच्चा स्वामी वही है जो दूसरों की क्षमता पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे।
राम कुशल प्रबंधक भी हैं।
उपलब्ध संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग, सही व्यक्ति को सही दायित्व और लक्ष्य के प्रति अडिग संकल्प — इन्हीं गुणों से असंभव भी संभव हुआ। पत्थरों पर राम नाम लिखकर बना सेतु केवल एक संरचना नहीं, वह विश्वास और समन्वय की मिसाल है। राम हमें सिखाते हैं कि बड़ी जीतें बड़े साधनों से नहीं, बड़े मन से मिलती हैं।
राम आदर्श भाई हैं।
लक्ष्मण का साथ, भरत का त्याग और शत्रुघ्न का समर्पण — यह सब राम के स्नेह और मूल्यों का ही प्रतिफल है। वनवास में लक्ष्मण का साथ जाना और राज्य मिलने पर भी भरत द्वारा सिंहासन पर राम की चरण-पादुका स्थापित करना बताता है कि जहाँ मूल्य जीवित हों, वहाँ परिवार केवल संबंध नहीं, साधना बन जाता है।
भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के लिए स्वामी, प्रजा के लिए न्यायप्रिय राजा, सुग्रीव और केवट के लिए सच्चे मित्र — राम हर रूप में मर्यादा हैं। इसी कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। सच ही तो है, मनुष्य की पहचान उसके पद से नहीं, उसके गुण और कर्म से होती है।
आज के समय में जब जीवन तेज़ है और मन अस्थिर, राम हमें ठहरना सिखाते हैं। जब अधिकार मिले तो विनम्र रहना, जब दुःख आए तो धैर्य रखना, और जब निर्णय लेना हो तो धर्म को आगे रखना — यही प्रभु श्रीराम का संदेश है।
यदि इन पंक्तियों ने आपके मन में राम-नाम की ध्वनि जगा दी हो,तो इसे आगे बढ़ाइए…आपका एक साझा किया गया संदेश किसी के जीवन में विश्वास, धैर्य और धर्म जगा सकता है।
जय श्री राम 🚩
श्रीहरि चरणों का दास – सुनील मिश्रा
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