"भारत में पत्रकारिता कभी एक पेशा हुआ करती थी। अब यह एक धंधा बन गया है। इसका साबुन बनाने से ज़्यादा कोई नैतिक काम नहीं है। यह खुद को जनता का ज़िम्मेदार सलाहकार नहीं मानता।"
डॉ. #बाबासाहेबअंबेडकर का भाषण, "रानाडे, गांधी और जिन्ना" पर, 18 जनवरी 1943 को पुणे में।
#डॉ बाबासाहेब आंबेडकर #फुले शाहू अंबेडकर