#परमात्मा #की #न्याय #व्यवस्था #ईश्वर की न्याय व्यवस्था*⚖️
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परमात्मा का न्यायउसकी हर व्यवस्था अटल है, ईश्वर किसी के भी साथ नाम मात्र को भी भेदभाव या पक्षपात नही करता। ईश्वर के यहाँ देर भी नही है और अन्धेर भी नहीं है। गेहूं का और इमली का दाना एक साथ बोने पर फल एक साथ नही देते तो क्या इमली के फल को देर से मिला फल माने? यह परमेश्वर की व्यवस्था है कौन सा कर्म कब फल देगा यह निर्णय वही करता है। सुख पाने के लिए हम दूसरों को सुख दे । सुख देने वाले को सदैव सुख मिलता है और दुःख देने वाले को दु:ख मिलता है। दूसरों को सुख दिये बिना जो सुख पाना चाहते है वे ईश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध जा रहें है। भला जो आपने किसी को दिया ही नही वह आपको मिलेगा कैसे? सुख और दुःख हमारे अच्छे - बुरे कर्मों के फल है। पहली बात तो बिना कर्म किये कोई फल उत्पन्न ही नही होता, दुसरी बात अच्छे कर्म का बुरा और बुरे कर्म का अच्छा फल नही होता। 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
अच्छे-बुरे कर्म की कसौटी भी परमात्मा ने हमको दे रखी है। जो हमें अपने लिए अच्छा लगे वो अच्छा और जो अपने लिए बुरा लगें वह बुरा। हम किसी को गाली दे रहे हैं, किसी का अपमान कर रहें हैं, किसी का धन छीन या ठग रहें है मिलावटी सामान दे रहे हैं। एक क्षण रूक कर विचार करें कि कोई हमारे साथ ऐसा ही करें तो हमें कैसा लगेगा? ह्रदय से उत्तर मिलेगा कि बुरा लगेगा तो मान लो यह बुरा कर्म है और इसका परिणाम भी बुरा ही मिलेगा
हमें सुख पाने की न्याय पूर्ण योजना बनानी होगी। हमें यह सोचना होगा कि हमारे कर्मों का फल मनुष्य नहीं परमात्मा देता है। झूठ, छल - कपट, जुगाड़बाजी, रिश्वतखोरी का प्रभाव मनुष्य में तो चल जाता है परमात्मा के यहाँ नहीं चलता। कुछ छोटी सोच वाले दूसरों को सुख देना घाटे का सौदा मानते हैं, उनकों समझाने के लिए इतना ही कहना है कि वे दूसरों को सुख देते समय यह न सोचे कि में किसी को सुख दे रहा हूँ, बल्कि यह सोचे कि में अपने लिए सुख कमा रहा हूँ। दूसरों को दुख देते समय भी यही सोच बनाए कि में अपने लिए दुख कमा रहा हूँ तो निश्चित रूप से हमारे मन-मस्तिष्क को सुख पाने की न्याय पूर्ण योजना मिल जाएगी और तब हम सुख पाने में अवश्य सफल होंगे।
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