sn vyas
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15 days ago
#गरूड़ पुराण #गरूड़ पुराण✍ गरुड़-पुराण की विशेषता 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ विद्या कीर्ति प्रभा लक्ष्मीजयारोग्यादिकारकम् । यः पठेच्छृणुयद्रुद सर्ववित् स दिवं व्रजेत ।। भगवान् हरि ने कहा- हे रुद्र! यह गरुड़ महापुराण विद्या, यश, सौन्दर्य, लक्ष्मी, विजय और आरोग्यादिका कारक है। जो मनुष्य इसका पाठ करता है या सुनता है, वह सब कुछ जान लेता है और अन्त में उसको स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यः पठेच्छृणुयाद्वापि श्रावयेद्वा समाहितः । संलिखेल्लेखयेद्वापि धारयेत् पुस्तकं ननु । धर्मार्थी प्राप्नुयाद्धर्ममर्थार्थी चार्थमाप्नुयात् ।। जो मनुष्य एकाग्रचित होकर इस महापुराण का पाठ करता है, सुनता है अथवा सुनाता है, जो इसको लिखता है, लिखाता है या पुस्तक के ही रूप में इसे अपने पास रखता है, वह यदि धर्मार्थी है, तो उसे धर्म की प्राप्ति होती है, यदि अर्थ का अभिलाषी है तो अर्थ प्राप्त होता है। गारुडं यस्य हस्ते तु तस्य हस्तगतो नयः । यः पठेच्छृणुयादेतद्भुक्तिं मुक्तिं समाप्नुयात् ।। जिस मनुष्य के हाथ में यह गरुड़ महापुराण विद्यमान है उसके हाथ में ही नीतियों का कोष है। जो प्राणी इस पुराण का पाठ करता है या इसको सुनाता है, वह भोग और मोक्ष दोनों को प्राप्त कर लेता है। धर्मार्थ काममोक्षांश्च प्राप्नुयाच्छ्रवणादितः । पुत्रार्थी लभते पुत्रान् कामार्थी काममाप्नुयात् ।। इस महापुराण को पढ़ने या सुनने से मनुष्य के धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष- इन चारों पुरुषार्थों की सिद्धि हो जाती है। इस महापुराण का पाठ करके या इसको सुनकर के पुत्र चाहने वाला पुत्र प्राप्त करता है तथा कामना का इच्छुक अपनी कामना प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर लेता है। विद्यार्थी लभते विद्यां जयार्थी लभते जयम्। ब्रह्महत्यादिना पापी पापशुद्धिमवाप्नुयात् ।। विद्यार्थी को विद्या, विजिगीषु को विजय, ब्रह्महत्यादि से युक्त पापी, पाप से विशुद्धि को प्राप्त करता है। वन्ध्यापि लभते पुत्रं कन्या विन्दति सत्पतिम् । क्षेमार्थी लभते क्षेमं भोगार्थी भोगमाप्नुयात् ।। बन्ध्या स्त्री पुत्र, कन्या सज्जनपति, क्षेमार्थी क्षेम तथा भोग चाहने वाला भोग प्राप्त करता है। मङ्गलार्थी मङ्गलानि गुणार्थी गुणमाप्नुयात् । काव्यार्थी च कवित्वं च सारार्थी सारमाप्नुयात् ।। मंगल की कामना वाला व्यक्ति अपना मंगल, गुणों का इच्छुक व्यक्ति गुण, काव्य करने का अभिलाषी मनुष्य कवित्वशक्ति और जीवन का सारतत्व चाहने वाला व्यक्ति सारतत्व प्राप्त करता है। ज्ञानार्थी लभते ज्ञानं सर्वसंसारमर्दनम् । इदं स्वस्त्ययनं धन्यं गारुडं गरुडेरितम् ।। ज्ञानार्थी सम्पूर्ण संसार का मर्दन करने वाला ज्ञान प्राप्त करता है "हे रुद्र!" पक्षिश्रेष्ठ गरुड़ के द्वारा कहा गया यह गारुड़महापुराण धन्य है। यह तो सबका कल्याण करने वाला है। नाकाले मरणं तस्य श्लोकमेकं तु यः पठेत्। श्लोकार्धपठनादस्य दुष्टशत्रुक्षयो धुवम् ।। जो मनुष्य इस महापुराण के एक भी श्लोक का पाठ करता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती। इसके मात्र आधे श्लोक का पाठ करने से निश्चित ही दुष्ट शत्रु का क्षय हो जाता है। अतो हि गारुड़ मुख्यं पुराणं शास्त्रसम्मतम्। गारुडेन समं नास्ति विष्णुधर्मप्रदर्शने ।। इसलिए यह गरुड़पुराण मुख्य और शास्त्र सम्मत पुराण है विष्णु धर्म के प्रदर्शन में गरुड़पुराण के समान दूसरा कोई भी पुराण नहीं है। यथा सुराणां प्रचरो जनार्दनो यथायुधानां प्रवरः सुदर्शनम् । तथा पुराणेषु च गारुडं च मुख्यं तदाहुर्हरितत्व दर्शनं ।। ग जैसे देवों में जनार्दन श्रेष्ठ है और आयुधों में सुर्दशन श्रेष्ठ है, वैसे ही पुराणों में यह गरुडपुराण हरि के तत्वनिरुपण में मुख्य कहा गया है। पुराणं गारुडं पुण्यं पवित्रं पापनाशम् । श्रृण्वतां कामनापूर्ण श्रोतव्यं सर्वदैव हि ।। यश्चेदं श्रृणुयान्मर्त्यो यश्चापि परिकीर्तयेत् । विहाय यातानां घोरां धूतपापो दिवं व्रजेत् ।। यह गरुड़ महापुराण बड़ा ही पवित्र एवं पुण्यदायक है। यह सभी पापों का विनाशक एवं सुनने वालों की समस्त कामनाओं का पूरक है। इसका सदैव श्रवण करना चाहिए। जो मनुष्य इस महापुराण को सुनता या पाठ करता है, वह निष्पाप होकर यमराज की भंयकर यातनाओं को तोड़कर स्वर्ग को प्राप्त करता है। साभार~ पं देव शर्मा💐 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️