आ खुदा से सामने मेरी शिकायत कर
पहले दिल को सब्र भी इनायत कर।
तू कहे गर मैं नहीं काम का तेरे अब
मेरी चाहत को मगर तू रिवायत कर।
वो अमानत हूँ मैं तेरे हवाले से
मेरी हस्ती को सरापा विलायत कर।
फस्ल-ए-अज़दाद की बातें बहुत हुईं
अब नई सोच की कोई हिकायत कर।
इन सितारों को ज़मीं पर भी नूर दे
जिगर को राहे-हक़ की हिदायत कर।
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