
Shamsher bhalu Khan
@jigarchuruvi
Teacher, social worker, आंदोलनकारी, Law Student
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
लघुकथा - पागल कौन ?
बहुत पुरानी बात है, बदरपुर राज्य का राजा बहुत बुद्धिमान एवं प्रजापलक था। राज कार्य में पारंगतता के साथ - साथ वह अध्ययन - अध्यापन व कला को बहुत महत्व देता था। समय समय पर उसके दरबार में विभिन्न विशेषज्ञ आते और अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन करते। राजा भी प्रसन्न हो कर उन्हें विभिन्न पुरस्कार देता।
राजा के इस व्यवहार के बारे में सुनकर एक बार एक ज्योतिषि उनसे मिलने आया और राजा से मिलने की इच्छा जताई। दरबारियों ने इस हेतु राजा को सूचित किया तो उसे दरबार में बुलाया गया।
सभी राजकार्य से संबंधित गणमान्य उपस्थित थे। राजा ने ज्योतिषी को उचित सम्मान दिया और आसन प्रदान किया। चर्चा चली के आप किस तरह की ज्योतिष विद्या में पारंगत हैं तो उस ने कहा में महामारियों से संबंधित भविष्यवाणी करता हूँ। राजा ने उत्सुकता से पूछा कि क्या हमारे राज्य में किसी प्रकार की महामारी की संभावना है ?
ज्योतिष ने जान की खैर मांगी और कहा "महाराज आज से 14 दिन बाद 5 मिनिट तक एक ऐसी हवा चलेगी जिस के संपर्क में आने वाला हर जीव पागल हो जायेगा।" राजा द्वारा पूछने पर के इस से बचाव का उपाय क्या हो सकता है तो ज्योतिष ने कहा कि अगर 5 मिनिट तक चलने वाली उस हवा के संपर्क से बचा लिया जाये तो ये बीमारी उस पर असर नहीं करेगी।
राजा ने ज्योतिष को बहुत सारी भेंट दे कर विदा किया। ज्योतिष पास ही खड़ी रानी को चुपके से एक कागज की पुड़िया पकड़ा कर चला गया। रानी ने एकांत में जा कर कागज को पढ़ा और फाड़ कर नष्ट कर दिया।
उधर राजा ने दरबार में राज्य के विद्वानों की सभा बुलाई। सभा में निर्णय हुआ कि पूरे राज्य की जनता को इस से नहीं बचाया जा सकता, चूंकि राज्य का महत्वपूर्ण व्यक्ति राजा होता है उसे बचा लिया जाए। पर कैसे बचाया जाये कोई संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिला। मोलवी, पंडित, बूझा, ओझा, सयाने-सेवड़े सब निरुत्तर हो गये।
पास ही के गांव कानासर में में सुसुप्ति नाम का कारीगर रहता था जो विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग करता रहता था। मंत्री ज्ञानुप्त ने उस कारीगर की सलाह लेने की बात राजा से कही। राजा ने तुरंत सुसुप्ति को दरबार में तलब किया।
हरकारे के साथ ही कारीगर सुसुप्ति ने अविलंब दरबार में हाज़िरी लगाई। राजा को झुक कर प्रणाम किया। राजा ने भविष्यवाणी से संबंधित बात बता कर समाधान के संबंध में कारीगर से राय पूछी। कारीगर ने पूरी बात सुनकर कहा,
"महाराज, इस समस्या का हल है। मैं एक शीशे का मकान बनाऊंगा जिस में हवा का प्रवेश नहीं होगा, आप उसमें बैठ कर भविष्यवाणी के अनुसार चलने वाली हवा से बच सकते हैं। राजा ने कारीगर को उसकी मांग के अनुसार सामग्री उपलब्ध करवाने के निर्देश मंत्री को दे कर कारीगर को पांच दिन में कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी दे कर सभा समाप्त की।
समय सीमा ए योजनानुसार कारीगर ने निश्चित समय पर कार्य पूर्ण कर राजा को निरीक्षण करवाया। कारीगर द्वारा तैयार शीशे का मकान उसे बहुत पसंद आया। राजा ने खुश हो कर कारीगर को बहुत धन एवं राजगीर की उपाधि दी। राजगीर रानी को एक शीशे की बोतल पकड़ा कर दरबार से बाहर चला गया।
अब भविष्यवाणी के पूरा होने का समय आ गया। उचित विधि-विधान के बाद राजा को शीशे के मकान में बंद कर वायुरोधी बना दिया गया और निश्चित समय पश्चात उस मकान को तोड़ कर निकलने हेतु राजा को एक हथौड़ा दे दिया गया।
समय आया हवा चली और भविष्यवाणी के अनुसार सब पागल हो गये। रानी ने ज्योतिषि के बतायेनुसार बहती हवा को कारीगर द्वारा दी गई में बोतल में बंद कर के पूर्व निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रख दिया।
अब राजा जी शीशे के मकान को तोड़ कर बाहर निकले तो जनता ने उन पर "पागल राजा - पागल राजा" कहते हुए पत्थर बरसाने शुरू कर दिये।
चूंकि निश्चित समय गुजर गया था वो हवा अब जा चुकी थी ज्योतिष जो निकट के राज्य में ठहरा हुआ था जो उस हवा के प्रभाव से सुरक्षित था पुनः राज्य में आया तो देखा राजा लहूलुहान पड़ा है। लोगों से पत्थरबाज़ी का कारण पूछने पर बताया गया कि राजा पागल हो गया है।
(बताईये पागल कौन, राजा या जनता ?)
ज्योतिषी ने जनता से कहा आप थोड़ी देर रुको में राजा को ठीक कर दूंगा। वो महल में दौड़ा और रानी को बताए पूर्व निश्चित स्थान पर पहुंच कर वहां रखी गई बोतल में बंद हवा राजा पर फेंकी।
हवा लगते ही राजा भी उन जैसा हो गया। जनता ने राजा के साथ - साथ थाली, घंटी, बर्तन, ढोल, नगाड़े जो हाथ लगा बजाने शुरू कर दिए। "राजाजी की जय, राजा जी की जय, राजा जी ठीक हो गए राजा जी ठीक हो गए" के नारों के साथ हर्ष में सब राज्य के नागरिक नाचने गाने लगे।
सवाल :- कुछ नहीं आपको जो समझ आया वही जवाब है।
जिगर चूरूवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह
युद्ध और बच्चे
एक मुस्कान
जो थी कभी परी सी
लाश बनी है।
छोटा टिफिन
मां ने खाना दिया था
है शिनाख्त।
हल्का गुलाबी
कंधे चढ़ा बस्ता
लाल खून से।
फूल थी वह
पापा की हथेली पे
आज कंधों पे।
विश्व शक्ति
लॉन्च पेड रॉकेट
से भारी लाशें।
खूं सना थैला
हाथों में फूल लिए
बेटी का बाप।
सुबह भेजा
पढ़ने के वास्ते
गुम मिट्टी में।
चीखती मां
कलेजा बाहर है
अविरल सिसकी।
दिन ढलता
है स्कूल बस खाली
नहीं लौटी वो।
ये चॉकलेट
शाम को खाऊंगी मैं
अब कहां है।
आधी पेंसिल
खून सनी किताब के
चंद सवाल।
ये साईकिल
ठीक करवानी थी
फफका बाप।
निकालता है.
जैसे हर चीज़ को
छू के आख़िर।
नन्ही जान थी
नहीं पता था उसे
परमाणु का।
छोटी किताब
पापा देखो ड्रॉइंग
नन्ही परी की।
एक रुमाल में
बंधे कुछ कंकर
बिखरे पड़े।
पत्थर दिल
उठा नहीं सकते
टूटा पहाड़।
शायद नहीं
उनके घर पर
कोई बच्चा।
जिन हाथों के
थोड़ी रेत लगते
रोने लगती।
आज दबी है
मनों रेत के नीचे
नन्हीं सी जान।
चीरती हुई
आसमान को चीख
एक स्कूल में।
गरजती हैं
मिसाइलें रुलातीं
मौत का खेल।
यह धमाके
मां पिताजी की याद
नहीं आने दें।
ए काश आज
उसे बुखार होता
बच जाती वो।
या कोई नेता
चल बसता पहले
का होता शौक।
शायद आज
बिटिया जिंदा होती
मेरी लाडली।
व्यापार की
वर्चस्व की लड़ाई
खुशियां छीनें।
मासूम जानें
जलते ड्रोन और
ये मिसाइलें।
#📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
क्रोध दया से छुपना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
मरते मारते मानव का क्रंदन
युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन
यह रक्त मानव भाल का चन्दन
हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन
शूल हृदय में नहीं चुभना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
लहराते झंडों के रंग लाल हुए
कवलित जनसाधारण अकाल हुए।
बिछे चहुं दिश बारूद के जाल हुए
विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए
बहता नाला लहू का सूखना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
मरता है मानव ये मरे या वो मरे
दयाहीन मानव शीश पर पग धरे
सत्ता, धन व्यापार कारण सब करे
निरंकुश मरने से तनिक न डरे
जड़ सामने ज्ञान के झुकना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
चेतना को जीवन से हवा कर दो
घायल की गति सारू दवा कर दो
पिपासुओं को संयमी वस्त्र सिलवा कर दो
उच्छृंखल भीरूऔं का डोरा करवा कर दो
दुःखी मन को ओर दुःख ना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
यह गहरी खाई का व्यापार किसके लिए
दूषित हत्यारा व्यवहार किसके लिए
यह बम, तलवारों की धार किसके लिए
प्रजा ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए
जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
जिगर चूरूवी #📚कविता-कहानी संग्रह
#पहले_मुर्गी_या_अंडा #hen #egg #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🎄हरे पेड़
#सवाल_दर्द_बात
दर्द की बातें
किसे पता है यार
दर्द की यादें।
ये खाली पेट
बड़ी ज़िम्मेदारी
शौक और ख्वाब
खुला आकाश
सूनी तंग गलियां
उड़ती धूल।
भटकी लाशें
शून्य आवरण में
रोयें कि हँसे।
आपराधिक
घुमंतू विचलित
हैं यायावर।
ये यादें कैसी
तपती धरती पे
राख का ढेर।
नंगे पैरों को
अंधेरों में रोशनी
खींच के लाई।
एक अरसा
तिल तिल तरसा
बूंद के लिए।
प्यासे की जात
रेत में जमा पानी
है याद रहा।
कुछ छुटा है
तलाश किरणों की
वह है कहां।
छोड़ गया है
डूबता हुआ सूर्य
एक सवाल।
#जिगर_चूरुवी
# #🤲 दुआएं #🎄हरे पेड़
आ खुदा से सामने मेरी शिकायत कर
पहले दिल को सब्र भी इनायत कर।
तू कहे गर मैं नहीं काम का तेरे अब
मेरी चाहत को मगर तू रिवायत कर।
वो अमानत हूँ मैं तेरे हवाले से
मेरी हस्ती को सरापा विलायत कर।
फस्ल-ए-अज़दाद की बातें बहुत हुईं
अब नई सोच की कोई हिकायत कर।
इन सितारों को ज़मीं पर भी नूर दे
जिगर को राहे-हक़ की हिदायत कर।
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह






![📚कविता-कहानी संग्रह - क्रोध दया से छुपना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरते मारते मानव का क्रंदन , विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए, युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन, बहता नाला लहू का सूखना चाहिए यह रक्त मानव भाल का चन्दन, हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन सत्ता , धन व्यापार कारण सब करे, निरकुश 1 मरने से तनिक न डरे ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए प्रजा जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए [PR మమర] क्रोध दया से छुपना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरते मारते मानव का क्रंदन , विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए, युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन, बहता नाला लहू का सूखना चाहिए यह रक्त मानव भाल का चन्दन, हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन सत्ता , धन व्यापार कारण सब करे, निरकुश 1 मरने से तनिक न डरे ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए प्रजा जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए [PR మమర] - ShareChat 📚कविता-कहानी संग्रह - क्रोध दया से छुपना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरते मारते मानव का क्रंदन , विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए, युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन, बहता नाला लहू का सूखना चाहिए यह रक्त मानव भाल का चन्दन, हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन सत्ता , धन व्यापार कारण सब करे, निरकुश 1 मरने से तनिक न डरे ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए प्रजा जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए [PR మమర] क्रोध दया से छुपना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरते मारते मानव का क्रंदन , विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए, युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन, बहता नाला लहू का सूखना चाहिए यह रक्त मानव भाल का चन्दन, हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन सत्ता , धन व्यापार कारण सब करे, निरकुश 1 मरने से तनिक न डरे ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए प्रजा जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए [PR మమర] - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_718486_118d9786_1772468391672_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=672_sc.jpg)

