Shamsher bhalu Khan
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क्रोध दया से छुपना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरते मारते मानव का क्रंदन युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन यह रक्त मानव भाल का चन्दन हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन शूल हृदय में नहीं चुभना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। लहराते झंडों के रंग लाल हुए कवलित जनसाधारण अकाल हुए। बिछे चहुं दिश बारूद के जाल हुए विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए बहता नाला लहू का सूखना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। मरता है मानव ये मरे या वो मरे दयाहीन मानव शीश पर पग धरे सत्ता, धन व्यापार कारण सब करे निरंकुश मरने से तनिक न डरे जड़ सामने ज्ञान के झुकना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। चेतना को जीवन से हवा कर दो घायल की गति सारू दवा कर दो पिपासुओं को संयमी वस्त्र सिलवा कर दो उच्छृंखल भीरूऔं का डोरा करवा कर दो दुःखी मन को ओर दुःख ना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। यह गहरी खाई का व्यापार किसके लिए दूषित हत्यारा व्यवहार किसके लिए यह बम, तलवारों की धार किसके लिए प्रजा ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए। जिगर चूरूवी #📚कविता-कहानी संग्रह
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