
Shamsher bhalu Khan
@jigarchuruvi
Teacher, social worker, आंदोलनकारी, Law Student
युद्ध और बच्चे
एक मुस्कान
जो थी कभी परी सी
लाश बनी है।
छोटा टिफिन
मां ने खाना दिया था
है शिनाख्त।
हल्का गुलाबी
कंधे चढ़ा बस्ता
लाल खून से।
फूल थी वह
पापा की हथेली पे
आज कंधों पे।
विश्व शक्ति
लॉन्च पेड रॉकेट
से भारी लाशें।
खूं सना थैला
हाथों में फूल लिए
बेटी का बाप।
सुबह भेजा
पढ़ने के वास्ते
गुम मिट्टी में।
चीखती मां
कलेजा बाहर है
अविरल सिसकी।
दिन ढलता
है स्कूल बस खाली
नहीं लौटी वो।
ये चॉकलेट
शाम को खाऊंगी मैं
अब कहां है।
आधी पेंसिल
खून सनी किताब के
चंद सवाल।
ये साईकिल
ठीक करवानी थी
फफका बाप।
निकालता है.
जैसे हर चीज़ को
छू के आख़िर।
नन्ही जान थी
नहीं पता था उसे
परमाणु का।
छोटी किताब
पापा देखो ड्रॉइंग
नन्ही परी की।
एक रुमाल में
बंधे कुछ कंकर
बिखरे पड़े।
पत्थर दिल
उठा नहीं सकते
टूटा पहाड़।
शायद नहीं
उनके घर पर
कोई बच्चा।
जिन हाथों के
थोड़ी रेत लगते
रोने लगती।
आज दबी है
मनों रेत के नीचे
नन्हीं सी जान।
चीरती हुई
आसमान को चीख
एक स्कूल में।
गरजती हैं
मिसाइलें रुलातीं
मौत का खेल।
यह धमाके
मां पिताजी की याद
नहीं आने दें।
ए काश आज
उसे बुखार होता
बच जाती वो।
या कोई नेता
चल बसता पहले
का होता शौक।
शायद आज
बिटिया जिंदा होती
मेरी लाडली।
व्यापार की
वर्चस्व की लड़ाई
खुशियां छीनें।
मासूम जानें
जलते ड्रोन और
ये मिसाइलें।
#📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
क्रोध दया से छुपना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
मरते मारते मानव का क्रंदन
युद्ध रक्त धार से करे अभिनंदन
यह रक्त मानव भाल का चन्दन
हे मनुज थामो इसे करबद्ध वंदन
शूल हृदय में नहीं चुभना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
लहराते झंडों के रंग लाल हुए
कवलित जनसाधारण अकाल हुए।
बिछे चहुं दिश बारूद के जाल हुए
विधवा स्त्री अनाथ बाल हुए
बहता नाला लहू का सूखना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
मरता है मानव ये मरे या वो मरे
दयाहीन मानव शीश पर पग धरे
सत्ता, धन व्यापार कारण सब करे
निरंकुश मरने से तनिक न डरे
जड़ सामने ज्ञान के झुकना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
चेतना को जीवन से हवा कर दो
घायल की गति सारू दवा कर दो
पिपासुओं को संयमी वस्त्र सिलवा कर दो
उच्छृंखल भीरूऔं का डोरा करवा कर दो
दुःखी मन को ओर दुःख ना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
यह गहरी खाई का व्यापार किसके लिए
दूषित हत्यारा व्यवहार किसके लिए
यह बम, तलवारों की धार किसके लिए
प्रजा ही नहीं तो सजे दरबार किसके लिए
जिगर आदमी न आगे आदमी के झुकना चाहिए
जहां भी हो युद्ध रुकना चाहिए।
जिगर चूरूवी #📚कविता-कहानी संग्रह
#पहले_मुर्गी_या_अंडा #hen #egg #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🎄हरे पेड़
#सवाल_दर्द_बात
दर्द की बातें
किसे पता है यार
दर्द की यादें।
ये खाली पेट
बड़ी ज़िम्मेदारी
शौक और ख्वाब
खुला आकाश
सूनी तंग गलियां
उड़ती धूल।
भटकी लाशें
शून्य आवरण में
रोयें कि हँसे।
आपराधिक
घुमंतू विचलित
हैं यायावर।
ये यादें कैसी
तपती धरती पे
राख का ढेर।
नंगे पैरों को
अंधेरों में रोशनी
खींच के लाई।
एक अरसा
तिल तिल तरसा
बूंद के लिए।
प्यासे की जात
रेत में जमा पानी
है याद रहा।
कुछ छुटा है
तलाश किरणों की
वह है कहां।
छोड़ गया है
डूबता हुआ सूर्य
एक सवाल।
#जिगर_चूरुवी
# #🤲 दुआएं #🎄हरे पेड़
आ खुदा से सामने मेरी शिकायत कर
पहले दिल को सब्र भी इनायत कर।
तू कहे गर मैं नहीं काम का तेरे अब
मेरी चाहत को मगर तू रिवायत कर।
वो अमानत हूँ मैं तेरे हवाले से
मेरी हस्ती को सरापा विलायत कर।
फस्ल-ए-अज़दाद की बातें बहुत हुईं
अब नई सोच की कोई हिकायत कर।
इन सितारों को ज़मीं पर भी नूर दे
जिगर को राहे-हक़ की हिदायत कर।
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह




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