#जय श्री राम *तीसरी-आँख*
*परमात्मा हमारे सबके अंदर है, और हम बाहर है,हम हमेशा बाहर से खटखटाते है , और घर का दरवाज़ा खोला अंदर से जाता है, हम बाहर से खटखटाते इसलिए है ताकि अंदर से हमारे घर का दरवाज़ा खुल जायें, इसलिए जब तक हम एकाग्रचित्त होकर अपनी सुरत को वापस आँखों के केन्द्र पर नहीं लाते ,तब तक हम रूहानी रास्ते पर नहीं चल सकते, जब हम अपनी सुरत को वापस यहाँ ले आते हैं,तब दरवाजा खुल जाता है , तीसरी आँख ,वह एक आँख खुल जाती है......*